आईएमए सागर में NICU प्रबंधन और नवजात चिकित्सा पर उच्चस्तरीय वैज्ञानिक सेमिनार
आईएमए सागर में NICU प्रबंधन और नवजात चिकित्सा पर उच्चस्तरीय वैज्ञानिक सेमिनार
सागर, 08 अगस्त। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) सागर शाखा द्वारा नवजात गहन चिकित्सा इकाई (NICU) के प्रबंधन और जटिल नवजात रोगों के उपचार पर उच्चस्तरीय वैज्ञानिक सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार में विशेषज्ञ चिकित्सकों ने समयपूर्व जन्मे, कम वजन वाले और गंभीर रूप से बीमार नवजातों के उपचार से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर अपने अनुभव साझा किए।
NICU में फंगल संक्रमण के बढ़ते खतरे पर चर्चा
पहले वैज्ञानिक सत्र में डॉ. कुलदीप सुखदेवे ने NICU में भर्ती समयपूर्व जन्मे, कम जन्म वजन वाले और गंभीर रूप से बीमार नवजातों में फंगल संक्रमण के बढ़ते जोखिम पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संक्रमण की समय पर पहचान, संक्रमण नियंत्रण के निर्धारित मानकों का पालन और एंटीफंगल दवाओं का विवेकपूर्ण एवं साक्ष्य-आधारित उपयोग नवजात शिशुओं की सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
उन्होंने चिकित्सकों को नवजातों में संक्रमण के संभावित लक्षणों को लेकर सतर्क रहने और समय पर आवश्यक उपचार शुरू करने पर जोर दिया।
जन्मजात हाइड्रोनेफ्रोसिस के निदान पर जानकारी
दूसरे सत्र में डॉ. दीपक गोयल ने जन्मजात हाइड्रोनेफ्रोसिस के समय पर निदान और प्रबंधन पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अधिकांश मामलों में नियमित अल्ट्रासाउंड जांच और चिकित्सकीय निगरानी से स्थिति को नियंत्रित किया जा सकता है। हालांकि, मूत्र मार्ग में रुकावट, बार-बार संक्रमण या गुर्दे की कार्यक्षमता प्रभावित होने की स्थिति में शल्य चिकित्सा की आवश्यकता पड़ सकती है।
जटिल नवजात मामलों के प्रबंधन पर विशेषज्ञ की राय
तीसरे वैज्ञानिक सत्र में डॉ. स्वप्निल भिसीकर ने NICU में गंभीर और जटिल मामलों के प्रबंधन से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि गंभीर रूप से बीमार और समयपूर्व जन्मे नवजातों के उपचार में समय पर सटीक निदान, निरंतर निगरानी, श्वसन सहायता, संक्रमण नियंत्रण, संतुलित पोषण और विभिन्न विशेषज्ञों की समन्वित टीम की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।
उन्होंने केस आधारित उदाहरणों के माध्यम से चिकित्सकों को व्यावहारिक उपचार रणनीतियों की जानकारी भी दी।
आईएमए सागर के अध्यक्ष डॉ. तल्हा साद ने कहा कि इस तरह के वैज्ञानिक और अनुभव आधारित शैक्षणिक आयोजन चिकित्सकों के व्यावसायिक ज्ञान, नैदानिक दक्षता और उपचार संबंधी निर्णय क्षमता को लगातार बेहतर बनाने में सहायक होते हैं। ऐसे कार्यक्रमों से चिकित्सकों को नई चिकित्सा तकनीकों और उपचार पद्धतियों से अपडेट रहने का अवसर मिलता है।
सेमिनार में सागर और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में चिकित्सकों ने सहभागिता की। चिकित्सकों ने विशेषज्ञों के साथ जटिल नवजात मामलों पर चर्चा की और अपने व्यावहारिक अनुभव भी साझा किए। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. स्वाति पटेल ने किया।