सागर का 200 साल पुराना स्कूल, यहां से पढ़े छात्र दुनिया भर में कमा रहे नाम
सागर की ऐतिहासिक पहचान सिर्फ किलों, मंदिरों और पुरानी इमारतों तक सीमित नहीं है। इस शहर की असली विरासत उसकी संस्कृति, परंपरा और उन संस्थानों में भी दिखाई देती है, जिन्होंने पीढ़ियों को गढ़ने का काम किया है। इन्हीं में से एक है सागर का एक्सीलेंस स्कूल—एक ऐसा शिक्षण संस्थान, जहां इतिहास की जड़ें आज की आधुनिक शिक्षा से जुड़ती नजर आती हैं।
1927 में अंग्रेजों के द्वारा स्थापित किए गए इस स्कूल की शुरुआत शहर की हृदय स्थल कटरा की एक बिल्डिंग से शुरू हुई थी जिस का आज कोई अस्तित्व नहीं है, अंग्रेज अफसर कैप्टन जेम्स द्वारा इसकी शुरुआत की गई थी और स्कूल के पहले प्रिंसिपल मैकलिन नाम के व्यक्ति बताए जाते हैं
पुरानी नगर निगम के सामने स्थित यह स्कूल सिर्फ पढ़ाई का केंद्र नहीं, बल्कि हजारों प्रतिभाओं की कर्मभूमि रहा है। यहां से शिक्षा हासिल करने वाले विद्यार्थी आज प्रशासन, न्यायपालिका, शिक्षा, विज्ञान, सेना, उद्योग और अन्य क्षेत्रों में अपनी पहचान बना चुके हैं। किसी ने देश की सेवा की, किसी ने समाज को नई दिशा दी तो किसी ने अपने हुनर से स्कूल और सागर का नाम रोशन किया।
एक समय था, जब इस ऐतिहासिक संस्थान की पहचान खपरैल से ढकी पुरानी इमारत से होती थी। लेकिन समय बदला और स्कूल ने भी खुद को बदलते दौर के साथ कदमताल कराया। साल 2021 में पूर्व छात्रों, प्रशासन, शहर के जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों ने मिलकर आर्थिक सहयोग जुटाया और स्कूल के भवन का रिनोवेशन कराया।
आज यही संस्थान आधुनिक सुविधाओं के साथ नई पीढ़ी को तैयार कर रहा है। स्कूल में 55 से अधिक विशेषज्ञ फैकल्टी विद्यार्थियों को शिक्षा दे रही है।
एक्सीलेंस स्कूल के प्रभारी प्राचार्य प्रदीप कुमार शर्मा के मुताबिक, वर्तमान में स्कूल में करीब 1350 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। यहां कक्षा 9वीं से 12वीं तक पढ़ाई होती है। 11वीं और 12वीं में विद्यार्थियों के लिए आर्ट्स, कॉमर्स, मैथ्स और बायो ग्रुप की सुविधा उपलब्ध है।
सागर के दूरदराज ग्रामीण इलाकों से आने वाले विद्यार्थियों के लिए स्कूल परिसर में हॉस्टल की सुविधा भी उपलब्ध है। गर्ल्स और बॉयज हॉस्टल में 100-100 सीटें हैं। यानी प्रतिभा अगर गांव से आती है, तो संसाधनों की दूरी उसके सपनों की राह नहीं रोकती। स्कूल के शिक्षक बीजू थॉमस बताते हैं कि इस संस्थान की स्थापना 1927 में हुई थी। इसके बाद वर्ष 2002 में सरकार ने स्कूलों को एक्सीलेंस संस्थान के रूप में विकसित करने की अवधारणा रखी। तब से यह संस्थान शिक्षा के क्षेत्र में लगातार अपनी अलग पहचान बनाए हुए है।
अब इस ऐतिहासिक स्कूल की कहानी एक और बड़े पड़ाव की ओर बढ़ रही है। वर्ष 2027 में पूर्व छात्रों की एलुमिनी मीट आयोजित करने की तैयारी है। स्कूल की 200 साल की गौरवगाथा को यादगार बनाने के लिए भव्य कार्यक्रम की योजना बनाई जा रही है।