सागर- 120 KM पैदल सफर, कंधे पर कांवड़ और नर्मदा जल! राहतगढ़ पहुंची 30 साल पुरानी भगवान विश्वनाथ कांवड़ यात्रा
सागर जिले के राहतगढ़ में शनिवार को आस्था और भक्ति का अद्भुत नजारा देखने को मिला। वोरास घाट से शुरू हुई भगवान विश्वनाथ कांवड़ यात्रा करीब 120 किलोमीटर का पैदल सफर तय कर राहतगढ़ नगर पहुंची। दोपहर करीब 3 बजे जैसे ही कांवड़ यात्रा ने नगर में प्रवेश किया, श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों ने जगह-जगह कांवड़ियों का जोरदार स्वागत किया। कांवड़ियों के नगर में पहुंचते ही माहौल भक्तिमय हो गया। स्थानीय लोगों ने श्रद्धालुओं का स्वागत कर उनका उत्साह बढ़ाया। कई स्थानों पर कांवड़ियों के लिए स्वागत और सेवा की व्यवस्था भी की गई।
करीब 30 वर्षों से लगातार जारी इस कांवड़ यात्रा की अपनी विशेष धार्मिक और सामाजिक पहचान है। इस वर्ष करीब 55 कांवड़िए यात्रा में शामिल हुए हैं। श्रद्धालु वोरास घाट से मां नर्मदा का पवित्र जल लेकर करीब 120 किलोमीटर का पैदल सफर तय करते हुए राहतगढ़ पहुंचे। कांवड़ियों के अनुसार, इस यात्रा को पूरा करने में उन्हें करीब पांच दिन का समय लगा। लंबा रास्ता, मौसम की चुनौतियां और थकान भी श्रद्धालुओं की आस्था को डिगा नहीं सकी। कंधों पर कांवड़ और उसमें मां नर्मदा का पवित्र जल लेकर श्रद्धालु लगातार पैदल चलते रहे।
राहतगढ़ नगर में प्रवेश के बाद कांवड़ यात्रा का अंतिम पड़ाव बनेनी घाट स्थित शिवालय रहा। यहां पहुंचने के बाद कांवड़ियों ने सबसे पहले बीना नदी के बनेनी घाट पर स्नान किया। इसके बाद विधि-विधान के साथ भगवान विश्वनाथ का जलाभिषेक किया गया। भगवान विश्वनाथ के अभिषेक के साथ ही करीब पांच दिनों से जारी कांवड़ यात्रा का धार्मिक अनुष्ठान पूर्ण हुआ। इस दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान शिव की आराधना कर क्षेत्र और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।
तीन दशक से चली आ रही इस यात्रा में हर वर्ष श्रद्धालु आस्था और विश्वास के साथ शामिल होते हैं। 120 किलोमीटर की पैदल यात्रा पूरी कर राहतगढ़ पहुंचे कांवड़ियों ने एक बार फिर साबित किया कि जब मन में भक्ति और संकल्प हो, तो कठिन रास्ते भी आसान हो जाते हैं। राहतगढ़ में यात्रा के स्वागत से लेकर भगवान विश्वनाथ के अभिषेक तक पूरा वातावरण हर-हर महादेव के जयघोष से गूंजता रहा।