बारिश के बीच अंतिम विदाई! छाता-त्रिपाल के सहारे अंतिम संस्कार, 50 साल पुराने मुक्तिधाम की खुली पोल
एक तस्वीर ने नगर की व्यवस्थाओं और जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां एक परिवार को अपने मृत परिजन की अंतिम विदाई बारिश के बीच छाता और त्रिपाल के सहारे करनी पड़ी। मामला पथरिया के वार्ड क्रमांक 15 स्थित खटीकों की खैर माता के पास बने पारंपरिक मुक्तिधाम का है, जहां करीब पांच दशक से अंतिम संस्कार किए जाने की बात सामने आई है। दरअसल, एमपी के सागर संभाग के दमोह जिले के पथरिया के वार्ड क्रमांक 14 निवासी बुजुर्ग फूलन अहिरवार का बीमारी के चलते निधन हो गया।
परिजन अंतिम यात्रा लेकर मुक्तिधाम पहुंचे, लेकिन उस समय लगातार बारिश हो रही थी। मुक्तिधाम में बारिश से बचने के लिए स्थायी शेड की व्यवस्था नहीं होने के कारण परिजनों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा। किसी ने छाता संभाला, तो किसी ने त्रिपाल के सहारे बारिश रोकने की कोशिश की। कुछ लोग चिता को बारिश से बचाने में जुटे रहे। इसके बावजूद मुक्तिधाम में जगह-जगह से पानी गिरता रहा। बारिश के बीच अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी करना परिवार के लिए बेहद कठिन हो गया।
मृतक के बेटे रघुवीर अहिरवार ने बताया कि पिता के अंतिम संस्कार के लिए परिवार मुक्तिधाम पहुंचा था, लेकिन बारिश के कारण काफी परेशानी हुई। छाता और त्रिपाल लगाने के बावजूद पानी गिरता रहा और मुखाग्नि देने में भी दिक्कत हुई। स्थानीय लोगों के मुताबिक, आसपास के अन्य मुक्तिधाम करीब 3 से 4 किलोमीटर दूर हैं। इसी वजह से वार्ड 15 और आसपास के लोग करीब 50 वर्षों से इसी पारंपरिक मुक्तिधाम का इस्तेमाल करते आ रहे हैं। इस दौरान हजारों लोग यहां अपने परिजनों को अंतिम विदाई दे चुके हैं।
स्थानीय पार्षद का कहना है कि मुक्तिधाम में शेड और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए कई बार लिखित शिकायत की गई। लेकिन कभी जमीन निजी होने की बात सामने आई, तो कभी बजट की कमी का हवाला देकर मामला अटकता रहा। पथरिया में अन्य मुक्तिधाम होने के बावजूद इस स्थान का वर्षों से इस्तेमाल हो रहा है। ऐसे में अब बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रशासन इस समस्या का स्थायी समाधान करेगा? बारिश में छाता और त्रिपाल के सहारे अंतिम संस्कार की यह तस्वीर व्यवस्था पर गंभीर सवाल छोड़ रही है। अब देखना होगा कि जिम्मेदार अधिकारी कब इस मुक्तिधाम में स्थायी शेड और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराते हैं।