बुलडोजर एक्शन पर 6 घंटे बवाल ! हाईकोर्ट के आदेश पर टूटा मकान, महिलाओं-बच्चों के छलके आंसू
हाईकोर्ट के आदेश पर अतिक्रमण हटाने पहुंची प्रशासनिक टीम के सामने एमपी के सीधी के जमोड़ी थाना क्षेत्र के बंजारी गांव में जमकर हंगामा हो गया। निजी भूमि से कब्जा हटाने की कार्रवाई के दौरान बसोर परिवार ने विरोध किया। इस दौरान पुलिस और परिवार के सदस्यों के बीच झूमाझटकी के आरोप लगे। करीब छह घंटे से ज्यादा चली कार्रवाई के बाद दो जेसीबी की मदद से कच्चे मकान को जमींदोज कर दिया गया। मकान टूटता देख महिलाओं और बच्चों की आंखों से आंसू छलक पड़े। मामला जिला मुख्यालय से करीब 10 किलोमीटर दूर बंजारी गांव का है। बताया जा रहा है कि 0.020 हेक्टेयर निजी भूमि पर बसोर परिवार ने कई साल पहले कच्चा मकान बनाया था। जमीन को लेकर लंबे समय से न्यायालय में मामला चल रहा था। हाईकोर्ट के आदेश के बाद प्रशासन ने जमीन खाली कराने की कार्रवाई शुरू की।
कार्रवाई के लिए एसडीएम प्रिया पाठक के नेतृत्व में प्रशासनिक और पुलिस अमला मौके पर पहुंचा। मौके पर बड़ी संख्या में अधिकारी और कर्मचारी तैनात रहे। करीब सात तहसीलदार, 35 पटवारी, डीएसपी सुजीत कड़वे समेत पांच थानों का पुलिस बल कार्रवाई के दौरान मौजूद रहा। प्रशासनिक टीम ने जैसे ही मकान खाली कराने की प्रक्रिया शुरू की, परिवार के लोगों ने इसका विरोध किया। इसी दौरान विवाद बढ़ गया और पुलिस तथा परिवार के सदस्यों के बीच झूमाझटकी के आरोप सामने आए। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने परिवार के कुछ सदस्यों को वाहनों में बैठाकर स्थिति को नियंत्रित किया। इसके बाद घर के अंदर रखा सामान बाहर निकलवाया गया।
इसी बीच कार्रवाई के दौरान घर में आग लगाने की कोशिश की गई। हालांकि प्रशासन और पुलिस की सक्रियता से समय रहते आग पर काबू पा लिया गया और बड़ा हादसा टल गया। इसके बाद दो जेसीबी की मदद से कच्चे मकान को तोड़ दिया गया। पूरी कार्रवाई छह घंटे से अधिक समय तक चली। इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर मौजूद रहे और तनावपूर्ण माहौल बना रहा। मकान टूटने के बाद परिवार का सामान खुले में पड़ा नजर आया।
सबसे भावुक तस्वीर उस समय सामने आई, जब घर टूटता देखकर परिवार की महिलाओं और बच्चों की आंखों से आंसू छलक पड़े। बरसात के मौसम में आशियाना टूटने के बाद परिवार के सामने रहने की समस्या खड़ी हो गई है। प्रशासन ने हाईकोर्ट के आदेश का पालन करते हुए विवादित भूमि को खाली करा लिया है। हालांकि इस कार्रवाई ने कानूनी आदेश के पालन के साथ परिवार के पुनर्वास और मानवीय पहलू को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन प्रभावित परिवार के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था करता है या नहीं।