रहली में IMA का मेगा हेल्थ अभियान: 47 लोगों की टीबी जांच, 3 में मिले संभावित लक्षण; मैनिकिन पर दिया CPR का प्रशिक्षण
रहली में IMA का मेगा हेल्थ अभियान: 47 लोगों की टीबी जांच, 3 में मिले संभावित लक्षण; मैनिकिन पर दिया CPR का प्रशिक्षण
सागर, 31 अगस्त। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने और आपात स्थिति में लोगों की जान बचाने की तकनीक सिखाने के उद्देश्य से इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) सागर और इंडियन सोसायटी ऑफ एनेस्थीसियोलॉजिस्ट्स (ISA) सागर ने संयुक्त रूप से आयुष्मान आरोग्य मंदिर, पटना बुजुर्ग, रहली में टीबी जांच एवं जागरूकता शिविर और CPR प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया।
कार्यक्रम में ग्रामीण नागरिकों को नजदीकी स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी देने के साथ टीबी के लक्षण, समय पर जांच और उपचार के महत्व के बारे में जागरूक किया गया। वहीं, अचानक हृदय रुकने की स्थिति में प्राथमिक मदद के तौर पर CPR देने का व्यवहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया।
जिले में 247 आयुष्मान आरोग्य मंदिर
IMA सागर के अध्यक्ष डॉ. तल्हा साद ने कहा कि आयुष्मान आरोग्य मंदिर ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को उनके घर के नजदीक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने बताया कि सागर जिले में 247 आयुष्मान आरोग्य मंदिर संचालित हैं।
इन केंद्रों पर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं के अलावा मधुमेह और ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियों की जांच, आवश्यक दवाओं का निःशुल्क वितरण और टेली-परामर्श जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं।
लंबे समय की खांसी को न करें नजरअंदाज
डॉ. तल्हा साद ने कहा कि लंबे समय तक खांसी, बुखार, वजन कम होना, रात में पसीना आना और भूख कम लगना जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे लक्षण होने पर समय रहते टीबी की जांच कराना जरूरी है।
उन्होंने बताया कि समय पर पहचान और उचित उपचार से टीबी को पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। उन्होंने लेटेंट टीबी संक्रमण के प्रति भी लोगों को जागरूक किया। उनके अनुसार, सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में पात्र लोगों के लिए Cy-TB जांच निःशुल्क उपलब्ध है। समय पर निवारक उपचार से भविष्य में सक्रिय टीबी का खतरा कम किया जा सकता है।
47 लोगों की जांच, 3 में मिले संभावित टीबी लक्षण
शिविर के दौरान 47 लोगों की स्वास्थ्य जांच की गई। इसमें रक्त जांच, बलगम जांच और पोर्टेबल डिजिटल एक्स-रे जैसी सुविधाओं का उपयोग किया गया।
जांच के दौरान 3 लोगों में टीबी के संभावित लक्षण पाए गए। उन्हें आगे की जांच और उपचार के लिए चिन्हित किया गया। वहीं, 2 नए मधुमेह रोगियों की भी पहचान हुई, जिन्हें आवश्यक परामर्श दिया गया।
मैनिकिन पर सिखाया CPR
कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण मैनिकिन आधारित CPR प्रशिक्षण रहा। मुख्य प्रशिक्षक डॉ. अजय सिंह ने प्रतिभागियों को अचानक हृदय रुकने की स्थिति में CPR देने की सही तकनीक का व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया।
उन्होंने मैनिकिन पर CPR करके दिखाया और बताया कि कार्डियक अरेस्ट के बाद शुरुआती कुछ मिनट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। समय पर शुरू किया गया CPR मस्तिष्क और शरीर के महत्वपूर्ण अंगों तक रक्त पहुंचाने में मदद कर सकता है और जीवन बचाने में अहम भूमिका निभाता है।
डॉ. तल्हा साद ने कहा कि टीबी की समय पर पहचान और CPR का सही ज्ञान, दोनों ऐसी महत्वपूर्ण जानकारियां हैं, जो जरूरत के समय किसी व्यक्ति की जिंदगी बचाने में मदद कर सकती हैं।
गांवों और संस्थानों में आगे भी होंगे जागरूकता कार्यक्रम
कार्यक्रम में जिला क्षय अधिकारी डॉ. आरिफ कुरैशी, डॉ. अभय, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी रविकांत अहीरवार, एएनएम रजनी, पिरामल स्वास्थ्य से आयुषी शुक्ला सहित स्थानीय नागरिकों का सहयोग रहा।
IMA और ISA सागर ने बताया कि यह कार्यक्रम जनस्वास्थ्य जागरूकता अभियान का हिस्सा है। भविष्य में गांवों, स्कूलों, कॉलेजों, सार्वजनिक स्थानों और कार्यालयों में टीबी जागरूकता एवं CPR प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसका उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना और आपात स्थिति में जीवन बचाने के लिए सक्षम बनाना है।