सागर- शुद्ध मिट्टी और पवित्र नदियों के जल से बनेंगी गणेश प्रतिमाएं, श्रद्धालुओं को निःशुल्क वितरण
सागर में इस बार गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश की प्रतिमाएं श्रद्धा के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देंगी। मध्यप्रदेश शासन के अपर लोक अभियोजक एवं समाजसेवी पंडित दीपक पौराणिक द्वारा गौ माता के गोबर, पंचगव्य, शुद्ध मिट्टी और गंगा, नर्मदा सहित पवित्र नदियों के जल के मिश्रण से भगवान गणेश की प्रतिमाओं का निर्माण कराया जा रहा है। खास बात यह है कि इन प्रतिमाओं का श्रद्धालुओं को निःशुल्क वितरण किया जाएगा।
सागर के ढाना क्षेत्र में भगवान गणेश की प्रतिमाओं के निर्माण की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। प्रतिमाओं के निर्माण में प्राकृतिक सामग्री का उपयोग किया जा रहा है। आयोजक पंडित दीपक पौराणिक के मुताबिक यह आयोजन लगातार 14वें वर्ष किया जा रहा है। पिछले 13 वर्षों से गणेश प्रतिमाओं का निर्माण कर उनका निःशुल्क वितरण किया जाता रहा है।
पंडित दीपक पौराणिक ने बताया कि इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य है कि भगवान गणेश की प्रतिमा का विधि-विधान से हर घर में पूजन हो और पीओपी से निर्मित प्रतिमाओं का उपयोग कम से कम किया जाए। इसके साथ ही प्राकृतिक सामग्री से बनी प्रतिमाओं के माध्यम से पर्यावरण और प्रकृति संरक्षण का संदेश भी लोगों तक पहुंचाया जा रहा है।
इन प्रतिमाओं की एक खास बात विसर्जन को लेकर भी है। आयोजकों के अनुसार पिछले वर्षों में कई परिवारों ने प्रतिमाओं का विसर्जन घर पर ही गंगा और नर्मदा के जल को मिलाकर कुंड अथवा पात्र में किया। इस वर्ष भी श्रद्धालुओं को घर पर ही पर्यावरण अनुकूल तरीके से विसर्जन के लिए प्रेरित किया जाएगा।
आयोजकों के मुताबिक गणेश चतुर्थी से पहले इन प्रतिमाओं का निःशुल्क वितरण किया जाएगा। वितरण का स्थान और समय जल्द ही सार्वजनिक किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक श्रद्धालु भगवान गणेश की प्रतिमा प्राप्त कर सकें। आयोजक पंडित दीपक पौराणिक ने कहा कि भगवान गणेश की कृपा से यह आयोजन लगातार आगे बढ़ रहा है।
उनकी कामना है कि हर घर में गणपति की पूजा हो और लोगों को रिद्धि-सिद्धि, शुभ-लाभ, सुख-समृद्धि और सफलता का आशीर्वाद मिले। श्रद्धा के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश देता यह आयोजन गणेश उत्सव को प्रकृति के और करीब लाने की पहल है। अब श्रद्धालुओं को निःशुल्क गणेश प्रतिमाओं के वितरण की तारीख और स्थान की आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।