MP | 18 साल बाद मिला बिछड़ा भाई, पुलिस ने इंटरनेट की मदद से परिवार से मिलाया
कहते हैं अपनों से बिछड़ने का दर्द सालों बाद भी कम नहीं होता, लेकिन जब अचानक कोई अपना वापस मिल जाए तो खुशी का ठिकाना भी नहीं रहता। एमपी की मुरैना पुलिस की मानवीय पहल ने 18 साल से बिछड़े एक परिवार को उसकी खुशियां लौटा दीं। बिहार के दरभंगा का मानसिक रूप से कमजोर युवक करीब 18 साल पहले घर से लापता हो गया था। परिवार ने लंबे समय तक उसकी तलाश की, लेकिन जब कोई सुराग नहीं मिला तो उसकी वापसी की उम्मीद भी लगभग खत्म हो गई। इसी बीच युवक मुरैना में पुलिस को मिला और इंटरनेट की मदद से पुलिस उसके परिवार तक पहुंच गई। मामला देवगढ़ थाना क्षेत्र का है।
थाना प्रभारी जयपाल सिंह गुर्जर को सड़क पर एक मानसिक रूप से कमजोर युवक घूमता हुआ दिखाई दिया। पुलिस उसे थाने लेकर आई और सबसे पहले उसकी देखभाल की। युवक को नहलाया गया और खाना खिलाया गया। इसके बाद पुलिस ने उससे नाम और पता जानने की कोशिश की, लेकिन वह अपना नाम या घर का पूरा पता बताने की स्थिति में नहीं था।
पुलिस ने लगातार युवक से बातचीत जारी रखी। करीब दो दिन बाद युवक ने अपने गांव का नाम ‘सिरनिया’ बताया। अब पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी कि केवल गांव के नाम के आधार पर युवक के परिवार का पता कैसे लगाया जाए। इसके बाद देवगढ़ पुलिस ने इंटरनेट की मदद से सिरनिया गांव की तलाश शुरू की। पड़ताल में पता चला कि यह गांव बिहार के दरभंगा जिले में है। पुलिस ने दरभंगा पुलिस से संपर्क किया और युवक की तस्वीर भी भेजी। तस्वीर लेकर दरभंगा पुलिस सिरनिया गांव पहुंची। वहां युवक के भाई सीताराम मल्लाह ने फोटो देखते ही उसे पहचान लिया। परिवार को पता चला कि 18 साल पहले लापता हुआ रघुवीर मुरैना में सुरक्षित है।
भाई के मिलने की खबर मिलते ही सीताराम और गांव के कुछ लोग बुधवार को देवगढ़ थाना पहुंचे। पुलिस ने पहचान और परिवार से जुड़े तथ्यों की पुष्टि करने के बाद रघुवीर को उसके भाई और ग्रामीणों के सुपुर्द कर दिया। 18 साल बाद भाई को सामने देखकर परिवार की खुशी देखते ही बन रही थी। रघुवीर के पिता का निधन हो चुका है और गांव में उसके भाई-बहन रहते हैं। मुरैना पुलिस की यह पहल एक बार फिर दिखाती है कि संवेदनशीलता और सही प्रयास से वर्षों से बिछड़े अपनों को भी मिलाया जा सकता है।