श्रीकृष्ण का 700 साल पुराना मंदिर, भक्त की भक्ति से प्रसन्न भगवान ने दिया था वचन, जुड़ी कई मान्यताएं
वैसे तो श्री कृष्ण जन्माष्टमी की देश भर में धूम देखने को मिलती है। वहीं कई ऐसे मंदिर हैं जो ऐतिहासिक और अनूठी आस्था के लिए जाने जाते हैं। इसी तरह सात सौ साल पुराना एक मंदिर भी है जिसे दाऊजी के नाम से जाना जाता है। चार सितम्बर को जन्माष्टमी मनाई जायेगी। जिससे यहां हज़ारों श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ेगा। वहीं ये दरबार फूल बंगला और दही हांडी से सजाया जायेगा। ये ख़ास मंदिर एमपी के मुरैना जिले में स्थित है। ऐसा कहा जाता है की दीपावली पर द्वारिकाधीश साढ़े तीन दिन के लिए मुरैना गांव आते हैं। श्री कृष्ण जन्माष्टमी को लेकर जिले भर में तैयारियां की जा रही हैं।
करीब 700 साल पुराने मंदिर की उत्पत्ति अपने आप मानी जाती है। दाऊजी मंदिर में जन्माष्टमी को लेकर विशेष तैयारियां की जा रही हैं। यहां हजारों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण का दरबार फूल बंगला और दही हांडी से सजाया जाएगा। मक्खन-मिश्री का भोग लगेगा। मंदिर में दिन भर श्रद्धालुओं की आवाजाही रहेगी। वहीं रात में श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के साथ विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी।
इस मंदिर से जुडी एक किवदंती ये भी है की भगवान श्रीकृष्ण ने मुरैना गांव के परम भक्त गोपेश्वर (गोपराम) स्वामी को दर्शन दिए थे। इसके बाद गोपेश्वर स्वामी ने मंदिर की स्थापना कराई। मान्यता है कि भगवान ने उन्हें स्वप्न में कहा था कि यह मंदिर गोपेश्वर (गोपराम ) स्वामी के नाम से ही जाना जाएगा। वह चार भाइयों में सबसे बड़े थे। सभी उन्हें दाऊ कहकर बुलाते थे। जिससे ये मंदिर आगे चलकर दाऊजी नाम से प्रसिद्ध हुआ। ये जगह प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है।
दाऊजी मंदिर की एक खास मान्यता भगवान द्वारिकाधीश के यहां आने की है। कहा जाता है की दीपावली के दूसरे दिन गोवर्धन पूजा से भगवान द्वारिकाधीश साढ़े तीन दिन के लिए मुरैना गांव स्थित दाऊजी मंदिर में आते हैं। जहां भगवान की कई लीलाओं का आयोजन किया जाता है। कभी द्वारिका न जा पाने वाले गोपेश्वर ने भगवान से आने की इच्छा व्यक्त की थी जिससे प्रसन्न होकर उन्होंने आने का वचन दिया था। तभी से साढ़े तीन दिन प्रवास की मान्यता चली आ रही है।
इसके अलावा और भी कई मान्यताएं प्रसिद्ध हैं। जिनमें पहली एकादशी से दीपावली के लक्ष्मी पूजन तक स्वामी परिवार में एक बच्चे का जन्म होता है वही बच्चा पूतना लीला करता है। दूसरी मान्यता गाय और उसके बछड़े से जुड़ी है। तीसरी, मंदिर के बाहर बने तालाब से जुड़ी मान्यता है
श्रद्धालु मानते हैं की यहां पूजा अर्चना करने और मनोकामना मांगने से वह पूरी होती हैं। वहीं मंदिर के पुजारी विजयकांत शर्मा ने भी जानकारी दी।