आज़ादी से आज तक सड़क के लिए इंतजार, गर्भवती महिलाओं से लेकर बॉडी तक खाट पर ढोने की मजबूरी
देश को आज़ाद हुए भले ही 79 साल हो चुके हों, लेकिन आज भी लोगों को मूलभूत सुविधाओं से जूझना पड़ रहा है। आलम कुछ ऐसा है की अगर गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाना हो या फिर किसी के निधन के बाद उसे गांव तक ले जाना हो तो खाट या खटिया ही सहारा बनती है। और हो भी क्यों न, क्योंकि गांव तक जाने के लिए पक्का रास्ता ही नहीं है। सोचने पर मजबूर करने और विकास के दावों-वादों को मुंह चिढ़ाती हुई ये तस्वीरें रीवा जिले के मनगवां विधानसभा क्षेत्र से सामने आई हैं। गंगेव ब्लॉक की ग्राम पंचायत रौरा के उन्मूलन स्थित पवाई टोला के ग्रामीण आज भी सड़क जैसी बुनियादी सुविधा के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
यहां पंचायत भवन और आंगनवाड़ी केंद्र होने के बावजूद टोले तक पहुंचने पक्की सड़क नहीं है। जिससे लोगों को मुसीबत उठानी पड़ती है। हालात तो ख़राब तब हो जाते हैं जब कोई व्यक्ति बीमार पड़ता है या किसी महिला को प्रसव के लिए अस्पताल ले जाना होता है। ऐसे में मरीजों और गर्भवती महिलाओं को खाट या चारपाई पर रखकर मुख्य मार्ग तक ले जाने की मजबूरी बनी रहती है। यहां तक की किसी की जान जाने के बाद पार्थिव शरीर को भी इसी तरह मुख्य मार्ग तक पहुंचाना पड़ता है। बारिश के समय पवाई टोला की समस्या और भी गंभीर हो जाती है। खराब और दुर्गम रास्ते के कारण आवागमन प्रभावित रहता है। जरूरत के समय वाहन भी टोले तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है। ग्रामीणों को जरूरी सामान लाने-ले जाने में भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
ग्रामीणों की समस्या को लेकर समाजसेवी अमरीश पटेल ने आवाज उठाई। उन्होंने कहा कि सालों से ग्रामीण सड़क की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हो सका। कहा की जब टोले में पंचायत भवन और आंगनवाड़ी केंद्र जैसी सरकारी संस्थाएं संचालित हो रही हैं तो वहां तक सुगम पहुंच मार्ग क्यों नहीं बनाया गया।