Sagar- 35 साल से ‘साहू सर’ बांट रहे शिक्षा की रोशनी, सैकड़ों गरीब बच्चों का संवारा भविष्य
कहते हैं शिक्षक सिर्फ किताबों का ज्ञान नहीं देता, बल्कि वह विद्यार्थियों के भविष्य की दिशा तय करता है। सागर जिले के गढ़ाकोटा में एक ऐसे ही शिक्षक हैं, जिन्होंने शिक्षा को नौकरी नहीं, बल्कि सेवा का माध्यम बनाया। हम बात कर रहे हैं अंबेडकर वार्ड निवासी सेवानिवृत्त शिक्षक खेमचंद साहू, जिन्हें विद्यार्थी प्यार से ‘साहू सर’ कहते हैं। पिछले करीब 35 वर्षों से वे आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद विद्यार्थियों को निःशुल्क कोचिंग दे रहे हैं।
साहू सर का मिशन है कि आर्थिक तंगी किसी भी बच्चे की प्रतिभा के रास्ते में बाधा न बने। वे विद्यार्थियों को नवोदय विद्यालय, सैनिक स्कूल, मिलिट्री स्कूल और श्रमोदय आवासीय विद्यालय जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं की प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी कराते हैं।
हर साल उनकी मेहनत और मार्गदर्शन से कई विद्यार्थी इन संस्थानों में चयनित होते हैं और अपने बेहतर भविष्य की नींव रखते हैं। हाल ही में नवोदय और श्रमोदय विद्यालयों में कक्षा छठवीं और नवमीं के प्रवेश परिणाम घोषित हुए, जिसमें सफल विद्यार्थियों की उपलब्धि ने साहू सर के वर्षों के समर्पण को एक बार फिर साबित किया।
साहू सर का मानना है कि प्रतिभा आर्थिक स्थिति की मोहताज नहीं होती। जरूरत है तो सिर्फ सही दिशा, मेहनत और अवसर की। इसी सोच के साथ उन्होंने दशकों से बिना किसी शुल्क के बच्चों को पढ़ाने का सिलसिला जारी रखा है।
उनके मार्गदर्शन में पढ़े कई विद्यार्थी आज डॉक्टर, इंजीनियर, पुलिस अधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी और सेना के जवान बनकर देश और समाज की सेवा कर रहे हैं। उनके पूर्व विद्यार्थी आज भी अपनी सफलता में साहू सर के योगदान को महत्वपूर्ण मानते हैं।
पूर्व विद्यार्थियों का कहना है कि साहू सर ने उन्हें सिर्फ प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार नहीं किया, बल्कि कठिन परिस्थितियों में आगे बढ़ने का आत्मविश्वास भी दिया। उनके लिए साहू सर एक शिक्षक से बढ़कर जीवन के मार्गदर्शक हैं।
कहा जाता है—‘प्रलय और निर्माण शिक्षक की गोद में पलते हैं।’ साहू सर का जीवन इस कथन की मिसाल है। उनका मानना है कि जिंदगी का असली खजाना तब मिलता है, जब कोई गुरु बिना स्वार्थ के किसी विद्यार्थी का भविष्य संवारने में अपना सर्वस्व लगा दे। करीब 35 वर्षों से जारी उनका यह शिक्षा-सेवा अभियान आज भी लगातार जारी है।