Sagar-जन्माष्टमी पर IMA का अनोखा अभियान: कविता से सिखाया CPR, लोगों ने सीखा जिंदगी बचाने का हुनर
जन्माष्टमी पर IMA का अनोखा अभियान: कविता से सिखाया CPR, लोगों ने सीखा जिंदगी बचाने का हुनर वृंदावन बाग मंदिर में विशाल CPR प्रशिक्षण शिविर, बच्चों और नागरिकों ने पुतले पर की प्रैक्टिस; IMA बोला- सही समय पर उठाया कदम बन सकता है जीवनदान सागर, 4 सितंबर 2026। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर सागर के वृंदावन बाग मंदिर में भक्ति के साथ मानव सेवा और जीवन रक्षा का अनूठा संदेश देखने को मिला। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) सागर की ओर से यहां विशाल CPR प्रशिक्षण एवं जनजागरूकता शिविर आयोजित किया गया। बड़ी संख्या में नागरिकों और विद्यार्थियों ने शिविर में हिस्सा लेकर अचानक हृदय गति रुकने की स्थिति में जीवन बचाने की बुनियादी तकनीक सीखी।
कार्यक्रम की खास बात यह रही कि CPR जैसी महत्वपूर्ण और तकनीकी प्रक्रिया को आम लोगों, खासकर बच्चों के लिए सरल कविता और लयबद्ध तरीके से समझाया गया। इसके बाद प्रतिभागियों ने प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन में पुतले पर CPR की व्यावहारिक प्रैक्टिस भी की। कविता में याद कराई CPR की प्रक्रिया IMA सागर के अध्यक्ष डॉ. तल्हा साद ने बताया कि प्रशिक्षण का उद्देश्य CPR को इतना सरल बनाना है कि जरूरत पड़ने पर कोई भी व्यक्ति घबराए बिना शुरुआती जीवनरक्षक कदम उठा सके। प्रतिभागियों को CPR की प्रक्रिया इस कविता के माध्यम से समझाई गई— “होश नहीं, श्वास नहीं, धड़कन का एहसास नहीं। जोर लगा कर तेज पुकारो, मदद खड़ी हो पास नहीं। तीस दबाव दो, दूना फूंको, जब तक धड़कन श्वास नहीं।”
इस सरल तरीके से प्रतिभागियों को बताया गया कि अचानक हृदय गति रुकने की स्थिति में समय बर्बाद किए बिना मदद के लिए पुकारना और CPR शुरू करना बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है। हर सेकंड महत्वपूर्ण, नागरिक बनें पहले रिस्पांडर डॉ. तल्हा साद ने कहा कि अचानक हृदय गति रुकने की स्थिति में अस्पताल पहुंचने से पहले का समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसे समय में आसपास मौजूद व्यक्ति यदि स्थिति को पहचानकर तत्काल उचित कदम उठाता है, तो पेशेवर चिकित्सा सहायता मिलने तक जीवनरक्षक सहायता दी जा सकती है।
उन्होंने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य सिर्फ CPR की जानकारी देना नहीं, बल्कि आम नागरिकों को ‘पहला रिस्पांडर’ बनने के लिए तैयार करना है। CPR की जीवनरक्षक क्षमता स्थापित होने के बावजूद आम लोगों द्वारा CPR किए जाने की दर बढ़ाने की जरूरत है। IMA सागर इसी दिशा में लगातार जागरूकता और प्रशिक्षण को बढ़ावा दे रहा है। देखो-समझो-करके सीखो पर जोर शिविर में प्रतिभागियों को केवल CPR की प्रक्रिया समझाई नहीं गई, बल्कि उन्हें स्वयं पुतले पर इसका अभ्यास कराया गया। प्रशिक्षकों ने ‘देखो-समझो-करके सीखो’ के सिद्धांत पर प्रशिक्षण देते हुए लोगों को व्यावहारिक रूप से CPR करने का अवसर दिया। इससे प्रतिभागियों में आपात स्थिति के दौरान सही कदम उठाने का आत्मविश्वास बढ़ाने का प्रयास किया गया। बच्चों और युवाओं की भागीदारी ने कार्यक्रम को और खास बना दिया। भक्ति के साथ मानव सेवा का संदेश डॉ. तल्हा साद ने कहा कि जन्माष्टमी जैसे आध्यात्मिक और सामाजिक रूप से महत्वपूर्ण अवसर पर CPR प्रशिक्षण शिविर आयोजित करने का उद्देश्य भक्ति के साथ मानव सेवा और जीवन रक्षा का संदेश देना है।
उन्होंने कहा कि CPR का ज्ञान केवल अस्पतालों या चिकित्सा संस्थानों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे परिवार और समुदाय के अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना जरूरी है। उन्होंने कहा, “किसी की जिंदगी बचाने के लिए हमेशा डॉक्टर होना जरूरी नहीं। कभी-कभी सही समय पर सही कदम उठाने वाला एक जागरूक नागरिक ही जीवनदाता बन जाता है।” IMA सागर की यह पहल आम नागरिकों को स्वास्थ्य जागरूकता के साथ आपात स्थिति में जिम्मेदारी निभाने और किसी जरूरतमंद की जिंदगी बचाने के लिए तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के रूप में सामने आई।