जिस रामघाट पर सुनाई देती थी राम नाम की गूंज,वहीं अब बाढ़ की तबाही के मंज़र, सैलाब ने बदली तस्वीर
जहां कभी तुलसीदास ने लिखा था चित्रकूट के घाट में भई संतन की भीर, वहीं अब तबाही के निशान दिखाई दे रहे हैं। बारिश ने ऐसा तांडव मचाया की तुलसी बाबा की प्रतिमा खंडित हो गयी है। सिर्फ सड़कों और घरों में ही पानी नहीं भरा बल्कि मंदिर में बाढ़ का पानी घुस गया। ये तस्वीरें सतना जिले के चित्रकूट से सामने आई। जहां ये इलाका बाढ़ की चपेट में है। हर तरफ सिर्फ पानी ही पानी नज़र आया।
बताया जा रहा है की चित्रकूट में लगातार हुई भारी बारिश के बाद बाढ़ के हालात बन गए। धार्मिक और ऐतिहासिक नगरी चित्रकूट का प्रसिद्ध रामघाट भी बाढ़ के पानी से बुरी तरह प्रभावित हुआ। जिस घाट पर श्रद्धालुओं की आस्था उमड़ती है जहां संत शिरोमणि तुलसीदास से जुड़ी स्मृतियां आज भी जीवंत हैं वही रामघाट इस बार सैलाब की चपेट में आ गया। लोगों का जीना मुहाल हो गया। जब जीवन भी बुरी तरह से प्रभावित हुआ।
ऐसी मान्यता है कि तुलसीदास ने रामघाट पर बैठकर भगवान राम की आराधना की थी। इसी स्थान से जुड़ी प्रसिद्ध चौपाई आज भी चित्रकूट की पहचान मानी जाती है उन्होंने लिखा था की चित्रकूट के घाट में भई संतन की भीर, तुलसीदास चंदन घिसें, तिलक देत रघुवीर।
लेकिन बाढ़ के बाद इसी ऐतिहासिक रामघाट की तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। घाट पर चारों तरफ पानी और तबाही के निशान दिखाई दे रहे हैं। बाढ़ का पानी प्राचीन तुलसी बाबा और तोता मुखी मंदिर के अंदर तक पहुंच गया। मंदिर परिसर में पानी उतरने के बाद भी बाढ़ के निशान साफ दिखाई दिए। बाढ़ में तुलसी बाबा की प्रतिमा भी खंडित होने की बात सामने आई है। जिससे श्रद्धालुओं में निराशा है। प्राकृतिक सैलाब ने आस्था और इतिहास से जुड़ी इस जगह पर चित्रकूट की विरासत को गहरा नुकसान पहुंचाया है।
जिस रामघाट पर कभी संतों की भीड़ और राम नाम की गूंज सुनाई देती थी। वहां अब बाढ़ की तबाही दिखाई दे रही है। हैरान कर देने वाले मंज़र नज़र आ रहे हैं। जो काफी चिंता का विषय है।