सागर- ढाना में परिवार समेत विराजे हैं श्री कृष्ण, नारियल और भारंग चढ़ाने से पूरी होती हैं मनोकामनाएं
सागर से तकरीबन 17 किलोमीटर दूर ढाना क्षेत्र जितना अपने आप में लोकप्रिय है उतनी ही यहां की विशेषताएं भी मानी जाती हैं। यहां एक ऐसा मंदिर है जहां भगवान श्री कृष्ण अपने परिवार समेत विराजे हैं। कई पीढ़ियां बदल गयी लेकिन यहां की पहचान और परंपरा नहीं बदली। खुद मंदिर के पुजारी को नहीं मालूम की यहां की प्रतिमाएं और मंदिर कितना पुराना हैं। इस मंदिर को लेकर कहा जाता है की यहां नारियल और भारंग चढ़ाने से हर मनोकामनाएं पूरी होती हैं। वहीं संतान सुख की प्राप्ति को लेकर भी एक विशेष मान्यता प्रचलित है। ढाना में स्थित ये मंदिर मुरली मनोहर नाम से जाना जाता है।
रहली विधानसभा क्षेत्र के ढाना में स्थित भगवान श्रीकृष्ण का ये बेहद प्राचीन मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है। यहां की कई सारी मान्यताएं मानी जाती हैं। श्रद्धालुओं का ऐसा मानना है कि यहां भगवान को एक नारियल और भारंग अर्पित करने से मनोकामना पूरी होती है। यहां कृष्ण भगवान अपने पूरे परिवार के साथ विराजमान हैं। पुजारी की माने तो मंदिर के निर्माण से संबंधित कोई प्रमाणिक दस्तावेज या रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। उनके पूर्वजों से ही यहां पूजा-अर्चना की परंपरा चली आ रही है पीढ़ियों से भगवान की सेवा की जा रही है।
ऐसा कहा जाता है की जिन महिलाओं के यहां संतान नहीं होती। वे संतान की कामना लेकर भगवान श्रीकृष्ण के मंदिर में आती हैं। मान्यता है कि बच्चे के जन्म के बाद मनाई जाने वाली छठी के दिन यहां भारंग चढ़ाने की परंपरा है। ऐसा दावा किया जाता है की कई महिलाओं की मनोकामनाएं पूरी हुई हैं।
यहां हर दिन भगवान श्रीकृष्ण की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। दिन में पांच बार आरती होती है। सुबह से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो जाता है। लोग दर्शन कर अपनी-अपनी मनोकामनाएं मांगते हैं। इस मंदिर से लोगों की गहरी आस्था है। अपनी-अपनी श्रद्धा है। प्राचीन होने के अलावा ये मंदिर सिद्ध माना जाता है। जिसकी एक अलग ही विशेष पहचान बनी हुई है।