मैहर में 55 लाख का पुल बारिश में धंसा, गुणवत्ता पर सवाल
एमपी के मैहर जिले में करीब 55 लाख रुपए की लागत से बना पुल लगातार बारिश के बीच क्षतिग्रस्त हो गया। जरियारी-नादन मार्ग पर बने इस पुल का एक हिस्सा धंसने के साथ सड़क भी टूट गई। पुल के पिलर के नीचे की मिट्टी के कटाव और धंसने की स्थिति सामने आने के बाद प्रशासन ने एहतियातन पुल पर आवागमन पूरी तरह बंद करा दिया है।
कलेक्टर बिदिशा मुखर्जी और एसपी अवधेश प्रताप सिंह ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। वहीं पुल के निर्माण और क्षति के कारणों की जांच के लिए तकनीकी कमेटी गठित की गई है। ये तस्वीरें मैहर जिले के जरियारी-नादन मार्ग की हैं, जहां लगातार बारिश के बाद करीब 55 लाख रुपए की लागत से बना पुल क्षतिग्रस्त हो गया। मार्च 2024 में बनकर तैयार हुआ यह पुल महज करीब ढाई साल के भीतर बारिश की मार नहीं झेल सका।
मौके पर निरीक्षण के दौरान पुल के एक हिस्से के धंसने के साथ पिलर के नीचे की मिट्टी में कटाव और सपोर्टिंग मिट्टी के खिसकने की स्थिति दिखाई दी। पुल की साइड वॉल में भी दरारें नजर आईं। पुल की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के लिहाज से यहां से आवागमन पूरी तरह बंद करा दिया है। पुल के दोनों ओर बैरिकेडिंग कर दी गई है, ताकि कोई वाहन या व्यक्ति क्षतिग्रस्त हिस्से तक न पहुंच सके। कलेक्टर ने ग्रामीणों से क्षतिग्रस्त पुल का इस्तेमाल नहीं करने की अपील की है। साथ ही अधिकारियों को वैकल्पिक मार्ग को दुरुस्त रखने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि लोगों को आने-जाने में परेशानी न हो।
एसपी अवधेश प्रताप सिंह ने एनवीडीए के अधिकारियों को पुल के आसपास मजबूत सीमेंटेड बैरिकेडिंग कराने के निर्देश दिए हैं। पुल का निर्माण नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण यानी एनवीडीए द्वारा कराया गया था। निर्माण एजेंसी फलोदी बताई जा रही है। इतनी कम अवधि में पुल के क्षतिग्रस्त होने के बाद अब निर्माण गुणवत्ता और तकनीकी मानकों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। कलेक्टर बिदिशा मुखर्जी ने मामले की तकनीकी जांच के लिए कमेटी गठित की है। कमेटी पुल की संरचना, पिलर के नीचे मिट्टी के कटाव, निर्माण गुणवत्ता और अन्य तकनीकी पहलुओं की जांच करेगी।
जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि पुल बारिश और मिट्टी के कटाव के कारण क्षतिग्रस्त हुआ या निर्माण में किसी तरह की तकनीकी कमी रही। फिलहाल प्रशासन ने पुल पर आवाजाही रोक दी है और तकनीकी जांच शुरू कर दी है। अब निगाहें जांच रिपोर्ट पर हैं, जो तय करेगी कि 55 लाख रुपए की लागत से बने इस पुल के इतनी जल्दी क्षतिग्रस्त होने की असली वजह क्या है।