सागर- कीचड़ में सनकर, दलदल वाली सड़क से स्कूल चले हम, बच्चे बोले मुख्यमंत्री जी सड़क बनवा दीजिये !
स्कूल चले हम, ये सरकार द्वारा चलाया गया ही अभियान है जो सुनने में तो काफी अच्छा लगता है। लेकिन बेरुखी ऐसी है की तस्वीरें बोल पड़ती हैं। दलदल से स्कूल चले हम, कीचड़ में सनकर स्कूल चले हम, जैसे भी हो बस मजबूरी में स्कूल चले हम, दलदल वाले रास्ते से होकर स्कूल जा रहे नौनिहालों का ये नज़ारा सागर जिले के बीना के मलिया गांव का है। जहां सड़क न होने से पांच साल तक के छोटे-छोटे बच्चों को कुछ इस तरह से होकर जाना पड़ता है। वह दो किलोमीटर का सफर तय करके बेलई गांव पढ़ने जाते हैं। बारिश के मौसम में ये रास्ता चलने या निकलने लायक ही नहीं रह जाता। पूरे रास्ते में कीचड़ रहता है। जिससे सफर जोखिम भरा होता है। बच्चों ने मुख्यमंत्री से गुहार लगाई की सड़क न बनने से परेशानी उठानी पड़ती है इसलिए रोड बनवा दीजिये।
ग्रामीणों ने एक पुरानी घटना का ज़िक्र करते हुए कहा की सड़क के अभाव में साल 2011 में एक गर्भवती महिला को समय पर अस्पताल नहीं पहुंचाया जा सका था। जिससे गर्भ में ही जुड़वा बच्चों की जान चली गई थी। मलिया गांव की दयनीय स्थिति में है सबसे ज्यादा परेशानी बारिश के सीजन में जाती है। क्योंकि पूरी सड़क दलदल में तब्दील हो जाती है। छोटे-छोटे बच्चे इसी रास्ते से होकर बेलई के स्कूल पहुंचते हैं। बारिश में पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है।
ग्रामीणों के मुताबिक 2011 में गर्भवती कल्पना को खटिया पर 2 किलोमीटर दूर बेलई तक ले जाना पड़ा था। इसके बाद ट्रैक्टर से अस्पताल पहुंचाया गया। ग्रामीणों का दावा है कि करीब 5 घंटे की देरी के कारण गर्भ में पल रहे जुड़वा बच्चों की जान चली गई थी। ग्रामीण अब सड़क की स्थायी मांग कर रहे हैं। वहीं विधायक निर्मला सप्रे का कहना है कि सड़क के लिए तीन बार प्रस्ताव भेजा जा चुका है स्वीकृति मिलते ही काम शुरू कराया जाएगा।