Sagar- शराब के कहर से अब तक 12 की मौत, आबकारी विभाग की लापरवाही भी एक बड़ी वजह !
सागर जिले की बंडा तहसील में जहरीली शराब ने ऐसा कहर बरपाया है कि कई गांवों में मातम पसरा हुआ है। पिछले करीब 48 घंटों में संदिग्ध जहरीली शराब के सेवन से मौतों का आंकड़ा बढ़कर 12 तक पहुंच गया है। वहीं, बड़ी संख्या में लोग बीमार हैं और कई की हालत गंभीर बताई जा रही है। सिविल अस्पताल से 10 से अधिक गंभीर मरीजों को इलाज के लिए सागर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया है। ऐसे में मृतकों की संख्या और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
बंडा तहसील के नौराज, बरेठी, बमूरा और गूगरा गांवों में शुक्रवार से ही लोगों की तबीयत बिगड़ने और मौतों का सिलसिला शुरू होने की बात सामने आई है। बताया जा रहा है कि बमूरा गांव में शुक्रवार को एक व्यक्ति की मौत हुई, जबकि शनिवार को तीन और लोगों ने दम तोड़ दिया। इसके बावजूद शुरुआती दौर में प्रशासन और आबकारी विभाग की सक्रियता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
घटना की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई परिवारों ने मौत की वास्तविक वजह सामने आने से पहले ही अपने परिजनों का अंतिम संस्कार कर दिया। बाद में जब एक के बाद एक लोगों की तबीयत बिगड़ने लगी और मौतें सामने आईं, तो पूरे क्षेत्र में दहशत फैल गई।
जहरीली शराब की इस घटना ने आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध शराब के कारोबार को लेकर पहले से शिकायतें सामने आती रही हैं। अब ग्रामीणों का आरोप है कि शराब की बिक्री पर प्रभावी निगरानी नहीं होने के कारण हालात इतने गंभीर हुए।
हालांकि, शराब के स्रोत को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। कुछ लोगों का कहना है कि शराब अवैध ठिकानों से खरीदी गई थी, जबकि कुछ ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि शराब सरकारी ठेके से खरीदी गई थी। ऐसे में जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि जहरीली शराब आखिर कहां से आई और इसमें किसकी भूमिका थी।
यदि शराब अवैध ठिकानों से पहुंची थी, तो सवाल है कि आबकारी विभाग की गश्ती और निगरानी व्यवस्था कहां थी? वहीं, अगर सरकारी ठेके से मिलावटी शराब की बिक्री हुई है, तो शराब की गुणवत्ता जांच और चेकिंग व्यवस्था पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है।