बारिश के तांडव से रुका जन जीवन, कढ़ाई में बैठाकर रपटा पार, 13 लोगों को SDERF ने मोटर बोट से बचाया
बारिश ने ऐसा तांडव मचाया की लोगों का जन जीवन जैसे रुक सा गया। लोग घरों में कैद हो गए। होने वाले तमाम काम भी प्रभावित हुए। इसी बीच कुछ ऐसी तस्वीर सामने आई जिसमें लोग रपटे पर करीब चार फ़ीट पानी होने से लोहे की कढ़ाई में बैठाकर रपटा पार करा रहे हैं। मरीज को इसी तरह ले जाय गया। वहीं 13 लोग बाढ़ के पानी में फंसे हुए थे जिनहे बाहर निकालने मोटर बोट पहुंची। तब कहीं उन्हें निकाला जा सका। मुरैना जिले का ये मामला काफी हैरान कर देने वाला है। क्योंकि यहां बाढ़ से हाहाकार मचा हुआ है। नदियां उफान पर हैं पुल डूबे हुए हैं इलाके लबालब हैं। कई जगहों से संपर्क टूट गया है।
मुरैना जिले में लगातार बारिश से क्वारी, सोन, आसन और कुरई नदी समेत कई नदी-नाले उफान पर हैं। रपटों के ऊपर पानी होने से ग्रामीण इलाकों में मुख्य मार्गों से संपर्क प्रभावित हुआ। खेरली-पचोखरा मार्ग पर बने नाले के रपटे के ऊपर करीब चार फीट पानी बह रहा है। इसके बावजूद ग्रामीण जान जोखिम में डालकर पानी के बीच से रास्ता पार कर रहे हैं। दरअसल इस मार्ग पर ग्रामीणों ने रपटे के दोनों किनारों पर रस्सी बांधी हुई है। भंडारा बनाने वाली बड़ी कड़ाई में बैठकर रस्सी के सहारे रपटा पार कर रहे हैं। कुछ ग्रामीण खुद पानी में उतरकर कड़ाई को खींचते हुए लोगों को दूसरी तरफ पहुंचा रहे हैं। मरीज को भी इसी तरह लेकर गए। रपटे पर पानी होने से पचोखरा, नरसिंहपुर, रामलालपुरा और भैरूसिंह का पुरा गांव मुख्य मार्ग से कट गए हैं।
ग्रामीणों के मुताबिक ऐसे हालात में आवागमन करना बेहद जोखिम भरा है। जिले में कई रपटों पर पानी बह रहा है। लोग मजबूरी में रास्ता पार कर रहे हैं। ऐसी जगहों पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों ने रपटों पर बैरिकेडिंग और सुरक्षा के इंतजाम की मांग की ताकि दुर्घटनाएं न हों।
जौरा क्षेत्र में सोन नदी की बाढ़ ने भी परेशानी बढ़ाई। सिकरौदा गोशाला के पास मालवा दुग्ध संघ के चिलर सेंटर में बाढ़ का पानी घुसने से काम कर रहे 11 कर्मचारी फंस गए। वहीं हनुमान मंदिर में पुजारी महावीर दास और भक्त करन सिकरवार भी बाढ़ के पानी में फंस गए थे। जिन्हे बाहर निकालने एसडीआरएफ की टीम पहुंची और मोटर बोट से 13 लोगों को निकाला गया। जौरा एसडीएम शुभम शर्मा और एसडीओपी नितिन बघेल की मौजूदगी में रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। अन्य लोगों को भी बाढ़ से निकालकर सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया। प्रशासन अन्य हालातों पर नज़र बनाये हुए है।