Sagar- 15 मौ तों के बाद एक्शन में सरकार, डिप्टी CM बोले लापरवाहों पर होगी कार्रवाई
सागर के बंडा क्षेत्र में अवैध और संदिग्ध जहरीली शराब से हुई 15 मौतों के बाद अब सरकार और प्रशासन एक्शन मोड में है। मामले को लेकर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री और सागर जिले के प्रभारी मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। उन्होंने साफ कहा कि अवैध शराब के कारोबार पर पूरी तरह रोक लगाई जाए और लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होगी। वहीं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी पूरे मामले की लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं।
बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में हुई समीक्षा बैठक में उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने बंडा क्षेत्र में अवैध शराब से प्रभावित मरीजों के इलाज और पुलिस-प्रशासन की कार्रवाई की जानकारी ली।
उन्होंने जिले की सभी शराब दुकानों की जांच, स्टॉक की निगरानी और अवैध शराब के कारोबार की गहन जांच के निर्देश दिए। साथ ही पुलिस अधीक्षक को जिला पुलिस प्रशासन में कसावट लाने और नशा मुक्ति अभियान को प्रभावी ढंग से चलाने के निर्देश दिए।
कलेक्टर प्रतिभा पाल ने बताया कि अवैध शराब से प्रभावित कुल 109 मरीजों का इलाज चल रहा है। इनमें 85 मरीज बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में भर्ती हैं, जिनमें 12 मरीज आईसीयू में हैं। जिला अस्पताल में 17 और बंडा सिविल अस्पताल में 7 मरीज उपचाररत हैं।
एक गंभीर मरीज को एयरलिफ्ट कर एम्स भोपाल भेजा गया है। प्रशासन के मुताबिक अधिकांश मरीजों की हालत फिलहाल स्थिर है। मरीजों के लिए दवाएं, जांच और डायलिसिस की सुविधाएं प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराई जा रही हैं।
प्रारंभिक जांच में जहरीली शराब का स्रोत बाहर से तैयार होकर सप्लाई होने की बात सामने आई है। इसमें मेथेनॉल की मिलावट पाए जाने की जानकारी दी गई है।
वहीं एसपी अनुराग सुजानिया के मुताबिक बंडा थाने में BNS और मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम के तहत 20 नामजद आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। इसके अलावा विनायका थाने में भी 10 नामजद आरोपियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष पुलिस टीमें बनाई गई हैं। पुलिस के मुताबिक बंडा मामले में नामजद 20 आरोपियों में से अब तक 10 को अभिरक्षा में लिया गया है और उनसे पूछताछ की जा रही है। फरार आरोपियों की तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है।
बैठक में जनप्रतिनिधियों ने भी मामले की विस्तृत जांच और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग रखी। डॉक्टरों के मुताबिक मरीजों का उपचार उनकी स्थिति और लक्षणों की गंभीरता के आधार पर किया जा रहा है। प्रभावित मरीजों के अस्पताल पहुंचने की दर में भी कमी आई है, जबकि गंभीर मरीजों का डायलिसिस जारी है।
15 मौतों और 109 मरीजों के इलाज के बाद अब सरकार की नजर शराब के पूरे नेटवर्क तक पहुंचने पर है। जांच के साथ कार्रवाई भी तेज कर दी गई है। अब देखना होगा कि इस मामले में जिम्मेदार लोगों तक पुलिस कब पहुंचती है और प्रशासनिक लापरवाही पर कितनी बड़ी कार्रवाई होती है।