Sagar -राखी पर बहन ने मांगी थी भाई की लंबी उम्र, आठ दिन बाद उसी भाई की अर्थी देख बिलख उठी
कहते हैं, कभी-कभी नियति इंसान से वह छीन लेती है, जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। सागर जिले के नौराज गांव में हुई राजेंद्र लोधी की मौत इसकी दर्दनाक तस्वीर है। महज 32 साल की उम्र में जहरीली शराब ने राजेंद्र की जिंदगी ही नहीं छीनी, बल्कि उसके पूरे परिवार की खुशियां भी उजाड़ दीं।
राजेंद्र तीन मासूम बेटियों का पिता था। सबसे बड़ी बेटी महज 7 साल की है, जबकि सबसे छोटी की उम्र सिर्फ 2 साल है। अगर नियति राजेंद्र के पक्ष में होती तो आज इन बेटियों के सिर पर पिता का साया होता। एक बूढ़े पिता की बुढ़ापे की लाठी होती, मां का लाडला उनके सामने होता और पत्नी की मांग का सिंदूर सलामत होता।
राजेंद्र मजदूरी करता था। आसपास के गांवों में पत्थर बनाने का काम करता और काम नहीं मिलने पर इंदौर चला जाता था। इस बार भी उसे इंदौर जाना था, लेकिन रक्षाबंधन के कारण वह कुछ दिन घर रुक गया। बहन से राखी बंधवाई। बहन ने भाई की कलाई पर राखी बांधते हुए उसकी लंबी उम्र और सुरक्षित रहने की दुआ की थी।
इसके बाद छोटे भाई का पैर टूट गया। उसके इलाज के लिए राजेंद्र ने इंदौर जाने का फैसला फिर टाल दिया। शायद उसे क्या पता था कि घर रुकने का यह फैसला उसकी जिंदगी का आखिरी पड़ाव बन जाएगा।
20-30 रुपये सस्ती मिलने वाली जहरीली शराब ने राजेंद्र को मौत की नींद सुला दिया।
आज वही बहन, जिसने कुछ दिन पहले भाई की कलाई पर राखी बांधी थी, उसकी लाश देखकर बिलख रही है। तीनों मासूम बेटियां शायद अब भी पिता के लौटने का इंतजार कर रही हैं।
नौराज गांव की हर गली में आज मातम है, हर घर में सन्नाटा है और एक परिवार की दुनिया हमेशा के लिए उजड़ गई है।