MP में बाढ़ का कहर, गर्भवती महिला समेत 112 लोगों का रेस्क्यू
बारिश थमने के बाद भी नदियों का उफान लोगों की मुश्किलें बढ़ा रहा है। मंगलवार को एमपी के मुरैना जिले के अंबाह क्षेत्र में क्वारी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से जिन्ना का पुरा, विपतिपुरा और झरना का पुरा गांवों में बाढ़ जैसे हालात बन गए। पानी से घिरे इन इलाकों में SDRF और आपदा प्रबंधन की टीम ने मोर्चा संभाला और गर्भवती महिला समेत कुल 112 लोगों को सुरक्षित निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। सबसे पहले जिन्ना का पुरा गांव से गर्भवती महिला के बाढ़ में फंसे होने की सूचना मिली। चारों तरफ पानी से घिरे इलाके में SDRF की टीम मोटरबोट के साथ मौके पर पहुंची और महिला को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। इसके बाद विपतिपुरा में 71 ग्रामीणों के फंसे होने की जानकारी सामने आई। पानी बढ़ने से पूरा इलाका टापू में तब्दील हो गया था।
SDRF की टीम ने मंगलवार सुबह से दोपहर तक रेस्क्यू अभियान चलाया और विपतिपुरा के सभी 71 ग्रामीणों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। वहीं झरना का पुरा गांव के एक हिस्से में भी क्वारी नदी का पानी घुस गया था। कई घरों तक पानी पहुंचने के बाद टीम ने मोटरबोट की मदद से 40 ग्रामीणों को सुरक्षित बाहर निकाला। प्रशासन के मुताबिक नदी का जलस्तर कुछ क्षेत्रों में कम हो रहा है, लेकिन अंबाह क्षेत्र में बढ़ते जलस्तर ने चिंता बढ़ा दी। बाढ़ के साथ किसानों की परेशानी भी बढ़ गई है। अतिवृष्टि और जलभराव से बाजरा, सोयाबीन और तिली जैसी फसलों को नुकसान पहुंचा है। किसान सभा ने कैलारस तहसीलदार सिद्धार्थ गौतम को ज्ञापन सौंपकर प्रभावित क्षेत्रों में फसल नुकसान का सर्वे कराने और मुआवजा देने की मांग की है।
किसानों का कहना है कि खुमान का पुरा सहित कई गांवों में पानी निकासी की व्यवस्था नहीं होने से सैकड़ों बीघा फसल प्रभावित है। बीरमपुर, निरारा, लहचोरा, डोंगरपुर और बस्तौली रीझौनी समेत कई क्षेत्रों में खेतों में पानी भरा हुआ है। बाढ़ से मधुमक्खी पालन करने वाले किसानों को भी नुकसान हुआ है, कई पेटियां पानी में बहने की बात सामने आई है। किसानों ने जल निकासी की व्यवस्था के साथ ऊंचे पुल बनाने की मांग भी की है। एक तरफ SDRF ने बाढ़ में फंसे 112 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया, तो दूसरी तरफ किसानों को अब फसल नुकसान के सर्वे और मुआवजे का इंतजार है। प्रशासन के सामने राहत के साथ जल निकासी और प्रभावित किसानों को मदद पहुंचाने की चुनौती भी बनी हुई है।