Sagar- खाने वाले पुंगों से बना दी 6 फ़ीट की गणेश प्रतिमा, अनोखी कारीगरी, 35 किलो सामग्री और 148 दिन की मेहनत
कहते हैं की कण-कण में भगवान का वास होता है वहीं एक कलाकार ने अपनी कलाकारी से ये साबित किया की कलाकृति की कोई सीमा नहीं होती। जी हां सागर के बीना में एक कलाकार ने खाने वाले पुंगों से अनोखी कारीगरी कर गणेश जी की प्रतिमा तैयार की है। इस छह फ़ीट की प्रतिमा बनाने में करीब 148 दिनों की मेहनत लगी है वहीं 35 किलो सामग्री का इस्तेमाल किया गया है।
बीना के कटरा वार्ड निवासी मूर्तिकार चौधरी अशोक साहू ने गणेश चतुर्थी के लिए कच्चे पुंगों से 6 फीट ऊंची गणेश प्रतिमा तैयार की है। जिसे बनाने में 28 हजार से ज्यादा पुंगों का इस्तेमाल हुआ है। अब यह प्रतिमा लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
बताया गया की अशोक साहू ने 1 अप्रैल से प्रतिमा बनाने का काम शुरू किया। लगातार मेहनत की। कच्चे पुंगों में बारिश के दौरान नमी आने की वजह से उन्होंने प्रतिमा का निर्माण बारिश शुरू होने से पहले ही पूरा कर लिया। इसके बाद प्रतिमा को सुरक्षित रखा गया। दिलचस्प बात ये है की इस दौरान खाने वाले पुंगों का इस्तेमाल किया गया। हज़ारों पुंगों को जोड़कर गणेश प्रतिमा का रूप दिया गया। जिसे देखने लोगों की होड़ मची हुई है।
अशोक साहू का दावा है कि कच्चे पुंगों से इतनी बड़ी गणेश प्रतिमा का निर्माण अपने आप में अनोखा प्रयास है। उनकी कोशिश पारंपरिक पीओपी और अन्य ऐसी सामग्रियों के विकल्प के तौर पर प्राकृतिक सामग्री से गणेश प्रतिमा बनाने की है।
अशोक साहू पिछले कई सालों से राम-जानकी साहू समाज मंदिर में अलग-अलग प्राकृतिक और रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली सामग्री से गणेश प्रतिमाएं बनाते आ रहे हैं। अब तक वे करीब 39 प्रकार की इको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमाएं बना चुके हैं। जिनमें घी, मूंगफली, लाई, दाल, मखाना, बूंदी के लड्डू, चना, नारियल, साबूदाना, माचिस की तीली, फूल, धागे की रील, धनिया, कैथ, नमकीन सेव, चूड़ी, बटन, डिस्पोजल, सितारा, ज्वार, राई, मक्का, मोमबत्ती और सोयाबीन समेत कई अलग-अलग सामग्रियों से बनाई गई प्रतिमाएं शामिल हैं। उनका उद्देश्य सिर्फ आकर्षक कलाकृति तैयार करना नहीं, बल्कि लोगों को पर्यावरण संरक्षण का संदेश देना भी है।
प्राकृतिक खाद्य सामग्री से बनी प्रतिमाएं विसर्जन के बाद प्रकृति में आसानी से मिल जाती हैं। इससे जलस्रोतों में प्रदूषण कम करने का संदेश भी लोगों तक पहुंचता है। अशोक साहू की इस अनोखी प्रतिमा को लेकर अब इसे गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज कराने की दिशा में प्रयास किए जाने की बात कही जा रही है। यदि यह प्रयास सफल होता है तो बीना के लिए यह बड़ी उपलब्धि होगी।------