Sagar- 45 साल का भरोसा, नया अंदाज—सांची की बदली पहचान
मध्यप्रदेश के प्रतिष्ठित सहकारी डेयरी ब्रांड सांची ने अपनी 45 वर्षों की विश्वसनीय विरासत को आधुनिक रूप देते हुए बुंदेलखंड में नई ब्रांड पहचान और री-डिजाइन की गई पैकेजिंग का अनावरण किया है। बुंदेलखंड में आयोजित रीब्रांडिंग समारोह में नई पैकेजिंग को पेश किया गया, जिसमें आधुनिक डिजाइन के साथ मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक और ग्रामीण विरासत की झलक भी देखने को मिली। नई ब्रांड पहचान के तहत सांची के दूध और अन्य दुग्ध उत्पादों की पैकेजिंग को नए रंगों, एकरूप लेआउट और आकर्षक डिजाइन के साथ तैयार किया गया है। खास बात यह है कि पैकेजिंग में मध्यप्रदेश की प्रसिद्ध गोंड कला से प्रेरित तत्वों को शामिल किया गया है। इसका मकसद सांची की पारंपरिक पहचान को बरकरार रखते हुए उसे आज के उपभोक्ताओं की पसंद और आधुनिक बाजार की जरूरतों से जोड़ना है।
कार्यक्रम में NDDB के रीजनल हेड वेस्ट जोन वी. श्रीनिवास, MPCDF के प्रबंध संचालक जयदेव बिस्वास, बुंदेलखंड दुग्ध संघ के CEO संजय कुमार यादव और वित्त विभाग की संयुक्त संचालक हेमलता पटेल सहित अधिकारी, वितरक और रिटेलर्स मौजूद रहे। अधिकारियों ने नई ब्रांडिंग को सांची की विरासत और आधुनिकता के बीच बेहतर तालमेल बताया। रीब्रांडिंग के साथ बुंदेलखंड दुग्ध संघ के लिए एक और सकारात्मक आंकड़ा सामने आया है। अप्रैल से अगस्त 2026 के बीच दूध संग्रह में पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 29.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। दैनिक औसत दूध संग्रह 2 लाख 66 हजार 270 किलोग्राम से बढ़कर 3 लाख 45 हजार 623 किलोग्राम हो गया।
नई पैकेजिंग सिर्फ दूध तक सीमित नहीं है। दही, पनीर, छाछ, मठ्ठा, चाय और अन्य दुग्ध उत्पादों को भी एक समान और आधुनिक रूप दिया गया है। सांची का कहना है कि इससे उत्पादों की बाजार में पहचान और दृश्यता बढ़ेगी। वहीं सहकारी व्यवस्था के केंद्र में मौजूद दुग्ध उत्पादक किसानों को मजबूत बाजार उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जा रहा है। 45 साल पुराने भरोसे को नए अंदाज में पेश करते हुए सांची अब बदलते बाजार और नई पीढ़ी के उपभोक्ताओं तक पहुंच बनाने की तैयारी में है। गोंड कला से जुड़ी स्थानीय पहचान और आधुनिक पैकेजिंग के साथ सांची का नया संदेश है—स्वाद, सेहत, सांची।