TET की अनिवार्यता के खिलाफ शिक्षक सड़क पर, प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन
एमपी के सागर संभाग के छतरपुर जिले के बकस्वाहा में शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी TET की अनिवार्यता को लेकर शिक्षकों का विरोध सामने आया है। मध्यप्रदेश राज्य कर्मचारी संघ तहसील बकस्वाहा ने 31 मार्च 2015 से पहले नियुक्त शासकीय शिक्षकों को TET की अनिवार्यता से छूट देने की मांग की है। इस संबंध में संघ की ओर से प्रधानमंत्री के नाम तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा गया। शिक्षकों का कहना है कि नियुक्ति के समय निर्धारित योग्यता पूरी करने वाले और लंबे समय से सरकारी सेवा दे रहे शिक्षकों को अब वर्षों बाद TET के लिए बाध्य नहीं किया जाना चाहिए।
मध्यप्रदेश राज्य कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि 31 मार्च 2015 से पहले नियुक्त शिक्षकों की नियुक्तियां उस समय लागू नियमों और निर्धारित शैक्षणिक योग्यताओं के आधार पर हुई थीं। ऐसे शिक्षक वर्षों से विभाग में सेवाएं दे रहे हैं और आवश्यक विभागीय प्रशिक्षण भी प्राप्त कर चुके हैं। संघ का तर्क है कि नियुक्ति के कई वर्षों बाद TET की अनिवार्यता लागू करने से लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों के सामने अनावश्यक परेशानी खड़ी हो रही है।
ज्ञापन में संघ ने नि:शुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 और राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद यानी NCTE की विभिन्न अधिसूचनाओं का हवाला दिया है। संघ ने RTE अधिनियम की धारा 23(2) के प्रावधानों का भी उल्लेख करते हुए शिक्षकों की पात्रता और प्रशिक्षण की स्थिति को स्पष्ट करने की मांग की है। शिक्षकों का कहना है कि TET संबंधी पात्रता का निर्धारण शिक्षक की नियुक्ति तारीख और उस समय लागू नियमों के आधार पर किया जाना चाहिए। इसके साथ ही वर्षों से शासकीय सेवा में कार्यरत शिक्षकों के अनुभव और उनकी सेवा अवधि को भी ध्यान में रखा जाना जरूरी है। संघ ने कहा कि नियुक्ति के समय जो शिक्षक निर्धारित योग्यता पूरी कर रहे थे, उनकी वर्तमान सेवा स्थिति को भी सरकार को ध्यान में रखना चाहिए।
ज्ञापन के माध्यम से केंद्र और राज्य सरकार से मांग की गई है कि 31 मार्च 2015 से पहले नियुक्त पात्र शासकीय शिक्षकों को TET की अनिवार्यता से छूट देने के संबंध में स्पष्ट और संशोधित दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। संघ का कहना है कि सरकार की ओर से स्थिति स्पष्ट होने से लंबे समय से सेवाएं दे रहे शिक्षकों को राहत मिलेगी और असमंजस की स्थिति खत्म होगी। बकस्वाहा में TET की अनिवार्यता को लेकर शिक्षकों की मांग अब ज्ञापन के जरिए सरकार तक पहुंचाई गई है। अब देखना होगा कि सरकार इस मांग पर क्या निर्णय लेती है और लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों को कोई राहत मिलती है या नहीं।