बैगा अंचल में बच्चों की मौत से हड़कंप, CM मोहन यादव पहुंचे ग्राउंड जीरो | SAGAR TV NEWS |
मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के बैगा जनजाति बहुल इलाकों में हाल ही में बच्चों की बीमारी से हुई मौतों ने शासन और प्रशासन का ध्यान खींचा है। सुदूर वनांचल में स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच, जागरूकता की कमी और रूढ़िवादी परंपराओं को इस संकट से जुड़े प्रमुख कारणों के तौर पर सामने रखा जा रहा है। हालात की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर पीड़ित परिवारों से सीधे मुलाकात की।
वीओ-1: बैगा बहुल गांवों में स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता की कमी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। बताया जा रहा है कि कई परिवार गंभीर बीमारी की स्थिति में अस्पताल जाने के बजाय झाड़-फूंक और पारंपरिक उपचार का सहारा लेते हैं। समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण सामान्य बीमारी भी गंभीर रूप ले सकती है। लंबे समय तक दुर्गम और नक्सल प्रभावित रहे वनांचलों में स्वास्थ्य एवं शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना भी बड़ी चुनौती है।
वीओ-2: एक अन्य चुनौती स्वास्थ्य विभाग की ओर से दी जाने वाली दवाइयों को लेकर बनी भ्रांतियां हैं। उचित संवाद और जानकारी के अभाव में कुछ लोग जीवनरक्षक या निवारक दवाइयों का सेवन करने के बजाय उन्हें फेंक देते हैं। ऐसे में स्वास्थ्य अमले के सामने इलाज के साथ-साथ लोगों का भरोसा जीतने और उन्हें सही जानकारी देने की चुनौती भी है।
वीओ-3: इसी बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव प्रभावित बैगा बहुल गांवों, बोंदारी और कोरका पहुंचे। मुख्यमंत्री ने पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। इस दौरान उन्होंने जमीन पर बैठकर ग्रामीणों से संवाद किया और स्वास्थ्य व्यवस्था की स्थिति को करीब से समझने का प्रयास किया। बच्चों को खोने वाले परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने प्रत्येक पीड़ित परिवार को 2-2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की।
वीओ-4: सरकार की ओर से क्षेत्र के 100 गांवों के समग्र विकास के लिए 225 करोड़ रुपये के विकास पैकेज की बात कही गई है। इसमें सड़क, पेयजल और स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। साथ ही स्वास्थ्य विभाग को गांवों में मेडिकल कैंप लगाने और बैगा समाज के बीच लगातार संवाद कर स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
आउट्रो: बालाघाट के बैगा अंचल में बच्चों की मौत की घटनाओं ने स्वास्थ्य व्यवस्था के साथ सामाजिक जागरूकता की चुनौती भी सामने रखी है। अब सरकार के सामने सबसे बड़ी जिम्मेदारी है कि सहायता के साथ-साथ दूरदराज के गांवों तक भरोसेमंद और समय पर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जाएं।