भोला आदिवासी फरारी कांड में थाना प्रभारी पर एक्शन, जवाबदेही पर सवाल
एमपी के सागर संभाग के दमोह जिले के पथरिया में लूटकांड के आरोपी भोला आदिवासी के पुलिस अभिरक्षा से फरार होने के मामले में पुलिस महकमे में कार्रवाई हुई है। थाना प्रभारी नेहा गोस्वामी को लाइन अटैच कर रक्षित केंद्र दमोह भेज दिया गया है। वहीं घटनास्थल पर मौजूद तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया है। कार्रवाई के बाद अब थाना प्रभारी की जवाबदेही और कार्रवाई के आधार को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा शुरू हो गई है।
पुलिस अभिरक्षा से आरोपी के फरार होने के मामले में उपनिरीक्षक संजू संयम, प्रधान आरक्षक संदीप कुशवाहा और आरक्षक कुलदीप जैन को निलंबित किया गया है। वहीं थाना प्रभारी नेहा गोस्वामी को लाइन अटैच किया गया। यानी एक ही घटनाक्रम में मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों पर निलंबन और थाना प्रभारी पर प्रशासनिक कार्रवाई की गई है।
कार्रवाई के बाद स्थानीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं कि घटनास्थल पर मौजूद तीन पुलिसकर्मियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई, जबकि थाना प्रभारी को लाइन अटैच किया गया। आखिर इस कार्रवाई का आधार क्या रहा? क्या पूरे घटनाक्रम में अलग-अलग स्तर पर जिम्मेदारी का आकलन किया गया है?
हालांकि पुलिस विभाग ने कार्रवाई के पीछे अपनी स्पष्ट वजह बताई है। खास बात यह भी रही कि नेहा गोस्वामी को लाइन अटैच किए जाने के कुछ ही घंटों बाद नए थाना प्रभारी महेंद्र सिंह जगेत ने पथरिया पहुंचकर प्रभार संभाल लिया। प्रशासन की ओर से त्वरित फैसला जरूर लिया गया, लेकिन कार्रवाई की प्रक्रिया और जिम्मेदारी तय करने के आधार को लेकर चर्चा बनी हुई है।
इस पूरे मामले पर दमोह पुलिस अधीक्षक आनंद कलादगी ने कहा कि किसी भी थाना क्षेत्र में होने वाली घटनाओं की समस्त जवाबदेही थाना प्रभारी की होती है। उन्होंने कहा कि पहले भी ऐसे मामलों में घटनास्थल पर मौजूद आरक्षकों के साथ थाना प्रभारी के खिलाफ कार्रवाई की गई है। इसी प्रक्रिया के तहत पथरिया थाना प्रभारी पर भी कार्रवाई की गई है। भोला आदिवासी की फरारी के बाद हुई कार्रवाई से पुलिस की जवाबदेही का मुद्दा सामने आया है। अब सवाल आरोपी की गिरफ्तारी के साथ-साथ यह भी है कि पुलिस अभिरक्षा से फरारी की घटना में जिम्मेदारी किस स्तर तक तय होती है और विभागीय जांच में आगे क्या निष्कर्ष सामने आते हैं।