Sagar- मिट्टी-गोबर से बने गणेश, 250 से ज्यादा प्रतिमाओं का निःशुल्क वितरण
सागर के ढाना में गणेश उत्सव को पर्यावरण संरक्षण और सनातन परंपराओं से जोड़ते हुए अनूठा आयोजन किया गया। मध्यप्रदेश शासन के अपर लोक अभियोजक एवं समाजसेवी दीपक पौराणिक द्वारा गौ माता के गोबर, पंचगव्य, शुद्ध मिट्टी और पवित्र नदियों के जल से तैयार की गई भगवान गणेश की प्रतिमाओं का निःशुल्क वितरण किया गया। कार्यक्रम में ‘हमारे गणेश’ विषय पर संगोष्ठी भी आयोजित हुई, जिसमें वक्ताओं ने भगवान गणेश की भक्ति, माता-पिता के प्रति समर्पण और पर्यावरण संरक्षण के महत्व पर विचार रखे।
आयोजन का यह चौदहवां वर्ष है। शनिवार को आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ स्वस्तिवाचन, दीप प्रज्वलन, कन्या पूजन और भगवान गणेश के पूजन के साथ हुआ। इसके बाद छात्र-छात्राओं ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। स्वागत भाषण के बाद कार्यक्रम में शामिल अतिथियों का पौधा देकर सम्मान किया गया। आयोजन में 250 से ज्यादा गणेश प्रतिमाओं का निःशुल्क वितरण किया गया। खास बात यह रही कि बच्चों और छात्र-छात्राओं ने प्रतिमाएं लेने में खासा उत्साह दिखाया।
हमारे गणेश विषय पर आयोजित संगोष्ठी में वक्ताओं ने भगवान गणेश के जीवन और उनके आदर्शों पर प्रकाश डाला। सेवानिवृत्त शिक्षक कृष्ण केशव पौराणिक ने भगवान गणेश की माता-पिता और गुरु के प्रति भक्ति तथा परिवार के प्रति समर्पण का उल्लेख करते हुए इसे जीवन में अपनाने की बात कही। ज्योतिषाचार्य एवं अनुष्ठानकर्ता कौशल किशोर पाठक ने सनातन धर्म में भगवान गणेश के स्थान और पूजन पद्धति की जानकारी दी। वहीं सरपंच सुरेंद्र तिवारी ने धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों को बड़े स्तर पर आयोजित करने की बात कही। पूर्व सरपंच घनश्याम ठाकुर ने शुद्ध मिट्टी और गोबर से गणेश प्रतिमा बनाने की प्राचीन एवं ग्रामीण परंपरा पर अपने विचार रखे। जनभागीदारी समिति अध्यक्ष गणेश दुबे ने प्लास्टर ऑफ पेरिस की प्रतिमाओं की जगह मिट्टी की प्रतिमाओं को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
सरस्वती स्कूल के संचालक राजकुमार चौबे ने विद्यार्थियों से भगवान गणेश के आदर्शों से प्रेरणा लेकर पढ़ाई में एकाग्रता, स्थिरता और धैर्य अपनाने की अपील की। आयोजक दीपक पौराणिक ने कहा कि प्रत्येक घर में भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित कर पूजा हो और पीओपी की प्रतिमाओं का कम से कम उपयोग किया जाए। उन्होंने छोटी मिट्टी की प्रतिमाओं का घर पर ही विसर्जन करने और प्रकृति व पर्यावरण संरक्षण में योगदान देने की अपील की। कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने आंवला के पौधे लगाए। इस तरह धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया गया। गणेश उत्सव के बीच ढाना में आयोजित इस कार्यक्रम ने आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक सकारात्मक संदेश दिया। मिट्टी और गोबर से बनी गणेश प्रतिमाओं का वितरण और पौधारोपण, आयोजन की खास पहचान बना।