बैंकों के सालों से अटके लाखों के लेनदेन यूं सुलझ गए, तो 17 जोड़े फिर एक दूजे के हुए
एक तरफ बैंकों का काफी समय से अटका लाखों रूपये का लेनदेन का मामला रफा-दफा हो गया। बैंकों-किसानों को राहत मिली। तो दूसरी तरफ 17 ऐसे जोड़े भी दोबारा एक हो गए जो सालों से अलग रह रहे थे। यानि टूटे हुए परिवार जुड़ गए। ये सब हुआ उज्जैन में आयोजित हुई नेशनल लोक अदालत में, जहां बैंकों ने अपने बकायादारों को साधने में पूरी ताकत झोंक दी थी। इस दौरान वित्तीय सुधारों और एनपीए वसूली का दंगल सा देखने मिला।
भारतीय स्टेट बैंक आरबीओ-5 उज्जैन के तहत मुख्य प्रबंधक पाटनी और मुख्य प्रबंधक कुजूर की अगुवाई में जीवनगंज मंडी शाखा ने इस महा अभियान में शानदार बाजी मारी। प्रबंधक निशांत कुमार और हरसोदन कटारा की सक्रिय टीम के साथ मिलकर एसबीआई ने जिला न्यायालय के सहयोग से करीब 47 लाख रुपए के खातों का ऑन द स्पॉट सेटलमेंट कर दिखाया की आपसी समझौते से बड़े वित्तीय विवाद कैसे चुटकियों में सुलझाए जाते हैं।
वहीं बैंक ऑफ इंडिया उज्जैन अंचल के जोनल मैनेजर अजीत शरण ने बताया की 20 लाख रुपए से कम के एनपीए मामलों के लिए बकाएदारों को बुलाया गया था। काफी संख्या में लोग पहुंचे भी। उन्होंने साफ़ किया की किसानों की जेब और खेत की वर्तमान स्थिति थोड़ी अलग है। क्योंकि फसल अभी खेतों में खड़ी है। कटाई का वक्त न होने से किसानों के पास नकदी की भी थोड़ी कमी है। जिससे रिकवरी का आंकड़ा अपेक्षित स्तर से थोड़ा नीचे रहा। लेकिन बैंक के लिए ये मंच संजीवनी की तरह साबित हुआ। लोक अदालत के जरिये बैंक को अदालती सुरक्षा कच मिल जाता है। अब दिसंबर में होने वाली लोक अदालत से और भी उम्मीदे हैं।
इस सब के अलावा कई रिश्ते भी दोबारा से जुड़ गए। उज्जैन कुटुंब न्यायालय की दो न्यायालयों में कुल 47 प्रकरण निराकृत हुए। प्रधान न्यायाधीश संजीव कुमार गुप्ता के मार्गदर्शन में चले इस सत्र में 17 जोड़ों ने आपसी गिले-शिकवे भुलाकर एक साथ रहने का राजीनामा किया। 17 टूटे हुए परिवार हमेशा के लिए फिर से एक हो गए। 53 खंडपीठों के समक्ष 15 हजार से ज्यादा लंबित प्रकरण रखे गए थे। जिसमें पारिवारिक विवाद, चेक बाउंस, मोटर क्लेम समेत अन्य मामलों का निपटारा हुआ