आंगनबाड़ी में एक्सपायरी पौष्टिक आहार का खुलासा, भवन सील
एमपी के उज्जैन जिले के खाचरौद से बच्चों के स्वास्थ्य और उनके हक से जुड़ा बेहद गंभीर मामला सामने आया है। ग्राम पंचायत नरेड़ीपाता की आंगनबाड़ी में कथित तौर पर एक्सपायरी डेट का पौष्टिक आहार मिलने के बाद हड़कंप मच गया। आरोप है कि कलेक्टर के निरीक्षण के डर से इस सामग्री को रात के अंधेरे में ठिकाने लगाने की कोशिश की जा रही थी। ग्रामीणों ने एक व्यक्ति को कथित तौर पर आंगनबाड़ी से सामग्री निकालते हुए पकड़ लिया। इसके बाद आंगनबाड़ी भवन को सील कर दिया गया।
अब पूरे मामले में जिम्मेदारों की भूमिका और कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं। दरअसल, उज्जैन कलेक्टर रोशन कुमार सिंह के खाचरौद दौरे और आंगनबाड़ियों में बच्चों को मिलने वाले पोषण आहार की जांच के बीच नरेड़ीपाता गांव में यह मामला सामने आया। ग्रामीणों का आरोप है कि आंगनबाड़ी में पिछले कई वर्षों का एक्सपायरी पौष्टिक आहार रखा हुआ था, जिसे बच्चों में वितरित नहीं किया गया।
आरोप है कि रात करीब 9 बजे एक व्यक्ति आंगनबाड़ी भवन में पहुंचा और पैकेटों को फाड़कर प्लास्टिक के कट्टों में भरने लगा। रोशनी देखकर कुछ ग्रामीण मौके पर पहुंचे और उसे पकड़ लिया। ग्रामीणों के मुताबिक पूछताछ में व्यक्ति ने बताया कि उसे एक्सपायरी सामग्री ठिकाने लगाने के लिए कहा गया था। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि जब यह पौष्टिक आहार बच्चों के लिए आया था, तो समय पर वितरित क्यों नहीं किया गया और एक्सपायर होने के बाद इसे हटाने की जरूरत क्यों पड़ी? मामले की जानकारी बाल विकास विभाग को दी गई, जिसके बाद ग्रामीणों की मौजूदगी में आंगनबाड़ी भवन को सील कर दिया गया।
मामले में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मंजू मालवीय के छुट्टी पर होने की जानकारी भी सामने आई है। वहीं आरोप है कि रात के समय उनके पति मुकेश मालवीय आंगनबाड़ी भवन में मौजूद थे। अब सवाल है कि रात में भवन में प्रवेश किस आधार पर हुआ और एक्सपायरी सामग्री को हटाने की अनुमति किसने दी थी? विभाग ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर क्या जांच की, इसका जवाब सामने आना बाकी है। स्थानीय स्तर पर कुछ प्रभावशाली लोगों द्वारा कार्यकर्ता को बचाने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं, हालांकि इन आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़े मामले में निगरानी की जिम्मेदारी किसकी थी? पौष्टिक आहार की गुणवत्ता और एक्सपायरी डेट की जांच कौन करता है? और अगर लापरवाही हुई है तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी? जब इस मामले को लेकर उज्जैन कलेक्टर रोशन कुमार सिंह से सवाल किया गया, तो उन्होंने कार्रवाई के संकेत दिए। फिलहाल आंगनबाड़ी भवन सील है, लेकिन ग्रामीणों के सवाल अब भी कायम हैं। देखना होगा कि जांच में क्या सामने आता है और क्या सिर्फ भवन सील करने तक कार्रवाई सीमित रहती है, या जिम्मेदारी तय कर दोषियों पर भी कार्रवाई होती है।