रेलवे लाइन भूमि अधिग्रहण को लेकर विरोध प्रदर्शन तेज,लोगों ने किया चक्काजाम,विधायक-पूर्व विधायक का समर्थन !
रेलवे लाइन भूमि अधिग्रहण को लेकर विरोध प्रदर्शन तेज होता जा रहा है। मुआवजे की प्रक्रिया को को लेकर पेंच फंसा हुआ है। बड़ी संख्या में लोगों ने सड़कों पर उतरकर जमकर प्रदर्शन किया साथ ही चक्काजाम कर दिया। खुद विधायक और पूर्व विधायक ने प्रदर्शनकारियों को अपना समर्थन दिया। मामला उज्जैन जिले का है। जहां नागदा रोलखुद से भाटीसूड़ा तक प्रस्तावित नई रेलवे लाइन के लिए भूमि अधिग्रहण और मुआवजे की प्रक्रिया को लेकर विरोध किया जा रहा है। इसी को लेकर नागदा-जावरा-उज्जैन बायपास पर चक्काजाम किया गया। जिन्हे महिदपुर विधायक दिनेश जैन बॉस और नागदा-खाचरौद के पूर्व विधायक दिलीप सिंह गुर्जर ने समर्थन दिया।
प्रदर्शन के दौरान किसानों ने अधिग्रहित जमीन के मुआवजे को लेकर आपत्ति जताई। किसानों के मुताबिक के भूमि का मुआवजा गाइडलाइन दर के आधार पर तय किया जा रहा है। जबकि वर्तमान बाजार मूल्य की तुलना में यह राशि कम है। किसानों ने मांग रखी की उनकी जमीन का मुआवजा वास्तविक बाजार मूल्य को ध्यान में रखते हुए कम से कम चार गुना दर से निर्धारित किया जाए।
ताकि भूमि अधिग्रहण के बाद उनके परिवार की आजीविका और भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। साथ ही ये भी मांग रखी की रूपेटा क्षेत्र में जहां अधिकतम गाइडलाइन दर करीब 46 लाख रुपए प्रति हेक्टेयर बताई जा रही है उसे आधार मानते हुए डाबली और आसपास के प्रभावित किसानों के लिए भी समान और न्यायसंगत मुआवजा निर्धारित किया जाए। भूमि अधिग्रहण से संबंधित नक्शों में दर्ज त्रुटियों को दूर कर वास्तविक भू-स्वामियों के नाम और भूमि विवरण सही किए जाने की मांग भी उठाई गई।
विधायक दिनेश जैन और पूर्व विधायक दिलीप सिंह गुर्जर के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने स्टेट हाईवे पर चक्काजाम किया। जिससे यातायात प्रभावित हुआ। सूचना मिलने पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे जहां प्रदर्शनकारियों से चर्चा की। एसडीएम रंजना पाटीदार समेत अन्य अधिकारीयों ने समझाइश देते हुए उचित आश्वासन दिया। जिसमें जल्द बैठक कर मुआवजे को लेकर निर्णय की बात कही गयी। तब कहीं जाम ख़त्म हुआ।
विधायक दिनेश जैन बोस और पूर्व विधायक दिलीप सिंह गुर्जर ने कहा की भूमि अधिग्रहण से प्रभावित किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए उचित मुआवजा निर्धारित किया जाना चाहिए। नहीं तो आगे बड़ा आंदोलन होगा।