अंतरराज्यीय फर्जी वीजा गिरोह का पर्दाफाश, 12.65 लाख की ठगी, 14 पासपोर्ट जब्त
पुलिस ने विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले एक अंतरराज्यीय फर्जी वीजा गिरोह का पर्दाफाश किया है। एमपी के पन्ना जिले के बृजपुर थाना क्षेत्र के दो युवकों को विदेश भेजने और नौकरी दिलाने का झांसा देकर आरोपियों ने 12 लाख 65 हजार रुपये ठगे थे। पुलिस ने तकनीकी और साइबर सर्विलांस की मदद से उत्तर प्रदेश और दिल्ली से गिरोह के दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से लाखों रुपये की नकदी, 14 पासपोर्ट, मोबाइल फोन और करीब 10 लाख रुपये कीमत की कार बरामद की गई है। मामले का खुलासा उस वक्त हुआ, जब विदेश जाने की उम्मीद लेकर पीड़ित अहमदाबाद एयरपोर्ट पहुंचे। आरोपियों ने उन्हें फर्जी वीजा लगे पासपोर्ट दिए थे। लेकिन एयरपोर्ट पर दस्तावेजों की जांच के दौरान वीजा फर्जी पाए गए। इसके बाद पीड़ितों को अपने साथ हुई जालसाजी का पता चला और मामला पुलिस तक पहुंचा।
शिकायत मिलने के बाद पन्ना पुलिस ने आरोपियों की तलाश शुरू की। साइबर और तकनीकी सर्विलांस के जरिए पुलिस ने उत्तर प्रदेश के बिजनौर से मुख्य आरोपी आशु चौधरी और दिल्ली के करावल नगर से उसके साथी आदिल उर्फ अली को गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में सामने आया कि गिरोह दिल्ली में वीजा और विदेश जाने के इच्छुक लोगों को निशाना बनाता था। नौकरी और विदेश भेजने का लालच देकर उनसे रकम ली जाती और बाद में फर्जी वीजा लगे पासपोर्ट थमा दिए जाते थे। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 9 लाख 50 हजार रुपये नकद, फर्जी वीजा लगे 5 पासपोर्ट समेत कुल 14 पासपोर्ट, 4 स्मार्टफोन और एक हुंडई वेन्यू कार बरामद की है। बरामद कार की कीमत करीब 10 लाख रुपये बताई गई है। पुलिस के अनुसार जब्त संपत्ति की कुल कीमत करीब 20 लाख रुपये है।
अब पुलिस आरोपियों के बैंक खातों और उनके संपर्क में रहे अन्य लोगों की जानकारी जुटा रही है। जांच इस दिशा में भी आगे बढ़ाई जा रही है कि गिरोह में और कितने लोग शामिल हैं और क्या इसके तार दूसरे राज्यों में सक्रिय एजेंटों से भी जुड़े हैं। विदेश में नौकरी और बेहतर भविष्य का सपना दिखाकर ठगी करने वाले इस गिरोह का नेटवर्क कितना बड़ा है, इसका खुलासा पुलिस की आगे की जांच में होगा। फिलहाल दोनों आरोपियों से पूछताछ जारी है।
सागर जहरीली शराब कांड के बाद मध्यप्रदेश में अवैध शराब के कारोबार को लेकर सवाल लगातार उठ रहे हैं। इसी बीच एमपी के गुना जिले में कच्ची शराब की कथित खुलेआम बिक्री का मामला सामने आया है। पड़ताल में सड़क किनारे टपरों, बस्तियों और सुनसान इलाकों में शराब उपलब्ध होने के दावे किए गए हैं। खास बात यह है कि आबकारी विभाग के रिकॉर्ड में जिले में अवैध शराब से जुड़े 62 स्थान चिन्हित बताए गए हैं। गुना जिले में अवैध शराब के जमीनी हालात को लेकर की गई पड़ताल में अलग-अलग इलाकों में कच्ची शराब की बिक्री के आरोप सामने आए। बीनागंज में कथित तौर पर सुबह से शराब की थैलियां उपलब्ध होने की बात कही गई, जहां कीमत 10 से 50 रुपये तक बताई गई। वहीं फतेहगढ़ क्षेत्र में सड़क किनारे एक टपरे पर 150 रुपये में तीन थैलियां मिलने का दावा किया गया।
पड़ताल में बमौरी के हीरामन तालाब के आसपास भी कथित तौर पर अवैध शराब बिक्री की जानकारी सामने आई। कैंट क्षेत्र के पटेल नगर और सिंगवासा में भी शराब उपलब्ध होने के आरोप लगाए गए। हरिपुर इलाके में तो शराब की बिक्री के लिए कम उम्र के बच्चे के इस्तेमाल का भी दावा किया गया है। यदि जांच में ये आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह प्रशासन के लिए गंभीर चिंता का विषय होगा। आबकारी विभाग के रिकॉर्ड में गुना जिले में 62 स्थान अवैध शराब के कारोबार से जुड़े चिन्हित बताए गए हैं। इनमें कैंट, राघौगढ़, फतेहगढ़, बमौरी, धरनावदा, मधुसूदनगढ़ और बीनागंज क्षेत्र के कई गांव और इलाके शामिल हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब विभाग के पास संदिग्ध ठिकानों की जानकारी मौजूद है, तो वहां अवैध शराब की बिक्री रोकने में कितनी सफलता मिल रही है।
सागर में जहरीली शराब से हुई मौतों के बाद अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई की जरूरत और बढ़ गई है। अवैध तरीके से तैयार शराब में जहरीले रसायनों की मिलावट का खतरा रहता है, जिससे गंभीर विषाक्तता हो सकती है। वहीं आबकारी विभाग का कहना है कि सूचना मिलने पर संबंधित पुलिस अधिकारियों को कार्रवाई के लिए सूचित किया जाता है और मौके पर कार्रवाई की जाती है। अब सवाल यही है कि चिन्हित 62 ठिकानों पर निगरानी और कार्रवाई कितनी प्रभावी है। गुना में कच्ची शराब की कथित बिक्री के सामने आए मामलों ने आबकारी और पुलिस की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इन आरोपों की जांच कर कितने ठिकानों पर कार्रवाई करता है और अवैध शराब के नेटवर्क पर कितना प्रभावी अंकुश लगा पाता है।