सागर हादसे के बाद गुना में कच्ची शराब का खुलासा, 62 ठिकानों पर सवाल | SAGAR TV NEWS |
सागर जहरीली शराब कांड के बाद मध्यप्रदेश में अवैध शराब के कारोबार को लेकर सवाल लगातार उठ रहे हैं। इसी बीच एमपी के गुना जिले में कच्ची शराब की कथित खुलेआम बिक्री का मामला सामने आया है। पड़ताल में सड़क किनारे टपरों, बस्तियों और सुनसान इलाकों में शराब उपलब्ध होने के दावे किए गए हैं। खास बात यह है कि आबकारी विभाग के रिकॉर्ड में जिले में अवैध शराब से जुड़े 62 स्थान चिन्हित बताए गए हैं। गुना जिले में अवैध शराब के जमीनी हालात को लेकर की गई पड़ताल में अलग-अलग इलाकों में कच्ची शराब की बिक्री के आरोप सामने आए। बीनागंज में कथित तौर पर सुबह से शराब की थैलियां उपलब्ध होने की बात कही गई, जहां कीमत 10 से 50 रुपये तक बताई गई। वहीं फतेहगढ़ क्षेत्र में सड़क किनारे एक टपरे पर 150 रुपये में तीन थैलियां मिलने का दावा किया गया।
पड़ताल में बमौरी के हीरामन तालाब के आसपास भी कथित तौर पर अवैध शराब बिक्री की जानकारी सामने आई। कैंट क्षेत्र के पटेल नगर और सिंगवासा में भी शराब उपलब्ध होने के आरोप लगाए गए। हरिपुर इलाके में तो शराब की बिक्री के लिए कम उम्र के बच्चे के इस्तेमाल का भी दावा किया गया है। यदि जांच में ये आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह प्रशासन के लिए गंभीर चिंता का विषय होगा। आबकारी विभाग के रिकॉर्ड में गुना जिले में 62 स्थान अवैध शराब के कारोबार से जुड़े चिन्हित बताए गए हैं। इनमें कैंट, राघौगढ़, फतेहगढ़, बमौरी, धरनावदा, मधुसूदनगढ़ और बीनागंज क्षेत्र के कई गांव और इलाके शामिल हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब विभाग के पास संदिग्ध ठिकानों की जानकारी मौजूद है, तो वहां अवैध शराब की बिक्री रोकने में कितनी सफलता मिल रही है।
सागर में जहरीली शराब से हुई मौतों के बाद अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई की जरूरत और बढ़ गई है। अवैध तरीके से तैयार शराब में जहरीले रसायनों की मिलावट का खतरा रहता है, जिससे गंभीर विषाक्तता हो सकती है। वहीं आबकारी विभाग का कहना है कि सूचना मिलने पर संबंधित पुलिस अधिकारियों को कार्रवाई के लिए सूचित किया जाता है और मौके पर कार्रवाई की जाती है। अब सवाल यही है कि चिन्हित 62 ठिकानों पर निगरानी और कार्रवाई कितनी प्रभावी है। गुना में कच्ची शराब की कथित बिक्री के सामने आए मामलों ने आबकारी और पुलिस की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इन आरोपों की जांच कर कितने ठिकानों पर कार्रवाई करता है और अवैध शराब के नेटवर्क पर कितना प्रभावी अंकुश लगा पाता है।