सागर- स्कूल-कॉलेजों के बाहर अतिक्रमण पर चला प्रशासन का एक्शन | SAGAR TV NEWS |
सागर में अवैध अतिक्रमण के खिलाफ पुलिस और प्रशासन का अभियान लगातार जारी है। इस बार कार्रवाई का फोकस स्कूल-कॉलेजों के आसपास है। पिछले तीन दिनों में जिले के 25 से अधिक शैक्षणिक संस्थानों के सामने से अवैध गुमटियां, ठेले, चाय-पान की दुकानें और अन्य अस्थायी अतिक्रमण हटाए गए हैं। पुलिस का कहना है कि इस कार्रवाई का उद्देश्य छात्र-छात्राओं के लिए सुरक्षित और सुगम आवागमन सुनिश्चित करना है। सागर पुलिस और जिला प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई के तहत ऐसे स्थानों को चिन्हित किया जा रहा है, जहां शासकीय भूमि पर अतिक्रमण कर रास्तों में बाधा पैदा की जा रही है। खास तौर पर स्कूल और कॉलेजों के आसपास लगी गुमटियों, ठेलों और अस्थायी दुकानों पर कार्रवाई की जा रही है।
पुलिस के मुताबिक, कई जगहों पर इन अस्थायी अतिक्रमणों के कारण विद्यार्थियों के आने-जाने में परेशानी होती थी। साथ ही स्कूल-कॉलेजों के आसपास अनावश्यक रूप से लोगों के खड़े रहने की स्थिति भी बनती थी। पुलिस अधीक्षक सागर अनुराग सुजानिया ने सभी थाना प्रभारियों और राजपत्रित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि अपने-अपने क्षेत्रों में शैक्षणिक संस्थानों के आसपास विशेष निगरानी रखें। अवैध अतिक्रमण चिन्हित कर प्रशासन के साथ समन्वय से कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
इसी के तहत पिछले तीन दिनों में 25 से ज्यादा स्कूल-कॉलेजों के सामने से अवरोध हटाए गए। पुलिस का कहना है कि अभियान केवल अतिक्रमण हटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि शैक्षणिक संस्थानों के आसपास सुरक्षित वातावरण तैयार करना भी इसका उद्देश्य है। स्कूल और कॉलेज लगने तथा छुट्टी के समय पुलिस द्वारा विशेष भ्रमण और निगरानी की जा रही है। अनावश्यक रूप से खड़े रहने वाले व्यक्तियों और सार्वजनिक स्थानों पर अव्यवस्था फैलाने वालों के खिलाफ समझाइश के साथ जरूरत पड़ने पर प्रतिबंधात्मक और वैधानिक कार्रवाई भी की जा रही है।
पुलिस अधीक्षक ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि स्कूल-कॉलेजों के मुख्य प्रवेश और निकास मार्ग पर किसी भी तरह का अवरोध नहीं रहने दिया जाए। दोबारा अतिक्रमण होने पर संबंधित विभागों के साथ समन्वय कर प्रभावी कार्रवाई की जाएगी। सागर पुलिस और प्रशासन का यह अभियान आगे भी जारी रहेगा। अब देखना होगा कि कार्रवाई के बाद शैक्षणिक संस्थानों के आसपास व्यवस्था कितनी बेहतर होती है और हटाए गए अतिक्रमण दोबारा तो नहीं लौटते।