सागर- राहतगढ़ में फसल बर्बादी से किसान परेशान, मुआवजे की मांग
बीते दिनों हुई तेज बारिश और आंधी-तूफान ने सागर जिले के राहतगढ़ क्षेत्र में किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। खेतों में खड़ी सोयाबीन, उड़द और मक्के की फसलों को नुकसान पहुंचने का दावा किया जा रहा है। फसल बर्बादी के बाद अब किसान मुआवजे और जरूरी सुविधाओं की मांग को लेकर सामने आए हैं। मंगलवार दोपहर करीब 3 बजे भारतीय किसान संघ के बैनर तले किसानों ने मुख्यमंत्री के नाम चार सूत्रीय ज्ञापन सौंपा।
किसानों का कहना है कि क्षेत्र में हाल ही में हुई तेज बारिश, आंधी और तूफान का असर खेतों में साफ नजर आ रहा है। ग्राम मानकी सलैया, कोलुआ, जैतपुरा, मड़देवरा, सागोनी, हुरा, परसरी, हिनोतिया और चंदनहारी सहित आसपास के कई गांवों में सोयाबीन, उड़द और मक्के की फसलों को नुकसान पहुंचने की बात कही गई है।
किसानों के मुताबिक, बारिश और तेज हवाओं से खेतों में खड़ी फसलें प्रभावित हुई हैं। ऐसे में उन्हें आर्थिक नुकसान की चिंता सता रही है। किसानों ने मुख्यमंत्री के नाम सौंपे गए ज्ञापन में चार प्रमुख मांगें रखी हैं। पहली मांग है कि खेती के लिए खाद, यूरिया और डीएपी समय पर पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराया जाए, ताकि आगामी फसल की तैयारी में किसानों को परेशानी न हो। दूसरी मांग कृषि सिंचाई के लिए 15 घंटे बिजली उपलब्ध कराने की है। किसानों का कहना है कि सिंचाई व्यवस्था बेहतर होने से खेती को काफी राहत मिल सकती है।
किसानों की तीसरी मांग वर्ष 2024-25 में कराए गए फसल बीमा की राशि दिलाने की है। किसानों का कहना है कि जिन फसलों का बीमा कराया गया था, उनके नुकसान के अनुरूप बीमा राशि उपलब्ध कराई जाए। वहीं चौथी और सबसे अहम मांग प्रभावित क्षेत्रों का मौके पर निरीक्षण कराकर फसल नुकसान का उचित आकलन और मुआवजा दिलाने की है। किसानों ने प्रशासन से खेतों का सर्वे कराने की मांग की है, ताकि वास्तविक नुकसान के आधार पर राहत मिल सके।
भारतीय किसान संघ के बैनर तले किसानों ने ज्ञापन के जरिए सरकार और प्रशासन से जल्द कार्रवाई की मांग की है। किसानों का कहना है कि प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान के बाद समय पर राहत नहीं मिली तो उनकी आर्थिक स्थिति और बिगड़ सकती है। अब किसानों की नजर प्रशासन की कार्रवाई पर है। सवाल यही है कि खेतों में हुए नुकसान का सर्वे कब शुरू होगा और प्रभावित किसानों को मुआवजा और बीमा राशि कब तक मिलेगी। किसानों को उम्मीद है कि सरकार उनकी चार सूत्रीय मांगों पर जल्द फैसला लेगी।