Sagar-आधी आबादी के सम्मान की लड़ाई, मां-बहन की गालियों के खिलाफ महाभियान | SAGAR TV NEWS |
समाज में मां-बहन की गालियों का सरेआम इस्तेमाल कोई नई बात नहीं है। सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं और बेटियों की मौजूदगी के बावजूद पुरुष वर्ग गाली-गलौज करने से बाज नहीं आता। इसी सामाजिक बुराई के खिलाफ अब सागर में वैचारिक स्वच्छता अभियान को और मजबूती देने की तैयारी है।
17 सितंबर को विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन के सामने ‘नो एब्यूज डे’ के अवसर पर लोगों को मां-बहन की गालियां नहीं देने की शपथ दिलाई जाएगी। इस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति भी शामिल होंगे।
सागर की साहित्यकार और समाजसेवी डॉ. वंदना गुप्ता लंबे समय से इस मुद्दे को लेकर जागरूकता अभियान चला रही हैं। वाराणसी में कॉलेज की पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने गाली-गलौज का विरोध शुरू कर दिया था। कोई उनके सामने गाली देता, तो वह तत्काल उसे टोक देती थीं।
शादी के बाद सागर आने पर वर्ष 2017-18 में जब वह कैंट बोर्ड की स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर बनीं, तो उन्होंने स्वच्छता को सिर्फ साफ-सफाई तक सीमित न रखते हुए विचारों की स्वच्छता से जोड़ने का प्रयास किया। यहीं से वैचारिक स्वच्छता अभियान की शुरुआत हुई।
डॉ. वंदना गुप्ता ने इस मुहिम को आगे बढ़ाने के लिए पीएमओ, राज्य सरकार और विभिन्न विभागों से संपर्क किया। शुरुआत में अभियान को ज्यादा तवज्जो नहीं मिली, लेकिन उन्होंने समझाया कि यह सिर्फ गालियों का मुद्दा नहीं, बल्कि आधी आबादी के सम्मान से जुड़ा सवाल है।
इसके बाद मध्य प्रदेश के स्कूली शिक्षा विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, उच्च शिक्षा विभाग और स्वास्थ्य विभाग ने भी अभियान से जुड़कर अपने-अपने संस्थानों में जागरूकता गतिविधियां शुरू कीं।
डॉ. वंदना गुप्ता के मुताबिक, 17 सितंबर 2019 से ‘नो एब्यूज डे’ मनाने की शुरुआत की गई थी।