सिस्टम के मुंह पर तमाचा मारती हुई तस्वीरें, कहां हैं सिस्टम कहां हैं जिम्मेदार, देखिये नज़ारा !
सिस्टम के मुंह पर तमाचा मारते हुए तस्वीरें देखिये, देखिये की लोग किस तरह से किन हालातों में नाले को पार कर रहे हैं। कितना शर्मसार करने वाला ये मंज़र है। छोटी-छोटी बच्चियां किस तरह स्कूल जा रहे हैं। महिलाएं किन परिस्थितियों में एक जगह से दूसरी जगह जा रही हैं। कहां हैं ये कहने वाले की विकास की गंगा बह रही है कहां हैं वो जिम्मेदार तो इन तस्वीरों के बावजूद चुप्पी साधे बैठे हुए हैं। अरे कुछ तो शर्म करो। ये मामला छतरपुर जिले के राजनगर तहसील के ग्राम पंचायत खैरी के चंदन पुरवा गांव का है। रास्ते में पढ़ने वाले रास्ते में पानी भरा हुआ है ऐसे में ट्यूब या बांस से बनाई हुई ये देशी जुगाड़ ही काम में आती है। इसी तरह से रास्ता पार होता है जिसमें जोखिम भी है लेकिन यही मजबूरी है। ग्रामीणों को ये जोखिम इसलिए उठाना पड़ता है क्योंकि पक्का रास्ता नहीं है। खेतों की पगडंडियों से सफर तय होता है। बारिश के दिनों में नाले पर पानी भरा रहता है। जिससे इस तरह जान जोखिम में डालकर निकलना पड़ता है। जिससे ख़तरा भी बना रहता है। आरोप है की चंदन पुरवा तक पहुंचने न पक्की सड़क है न ही नाले पर पुलिया। बाकि क्या आलम है तस्वीरें सारी हकीकत बयां कर रही हैं। इस समस्या से ग्रामीण परेशान हैं जो फ़रियाद करने कलेक्टर के पास पहुंचे थे। जिन्हे फिलहाल आश्वासन दिया गया है।
बताया गया की चंदन पुरवा गांव के लोगों को कई सालों से समस्या का सामना करना पड़ रहा है। सामान्य दिनों में जैसे तैसे आवागमन हो जाता है लेकिन बारिश का सीजन आते ही परेशानी बढ़ जाती है। नाला अपने शबाब पर आ जाता है जिससे गांव का संपर्क भी टूट जाता है। बच्चे स्कूल नहीं जा पाते। वहीं महिलाएं और बुजुर्गों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। जरूरी काम होने पर कुछ इस तरह से नाले को पार करना पड़ता है। आरोप है की लंबे समय से पुलिया के निर्माण की मांग की जा रही है लेकिन समाधान अब तक नहीं हो सका है। हालात जस के तस हैं।
परेशान ग्रामीण जनसुनवाई में पहुंचे थे। जिन्होंने प्रशासन को समस्या से अवगत कराते हुए चंदन पुरवा गांव की समस्या दूर करने की मांग की है।
वहीं तहसीलदार पीयूष दीक्षित ने इस मामले की जांच कराकर समस्या के समाधान का आश्वासन दिया है।-