सागर के बंडा शराब मामले में बकस्वाहा में महिलाएं सड़क पर उतरीं
बंडा में जहरीली शराब से हुई मौतों के बाद अब आसपास के इलाकों में भी शराब के खिलाफ विरोध के स्वर तेज होने लगे हैं। एमपी के सागर संभाग के छतरपुर जिले के बकस्वाहा में महिलाओं और ग्रामीणों ने गांवों में कथित अवैध शराब की बिक्री और आपूर्ति पर रोक लगाने की मांग को लेकर सड़क पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री और कलेक्टर के नाम तहसीलदार त्रिलोक सिंह पोषाम और थाना प्रभारी प्रशांत सेन को ज्ञापन सौंपकर तत्काल कार्रवाई की मांग की है। बकस्वाहा में हुए प्रदर्शन के दौरान महिलाओं और ग्रामीणों ने गांवों में शराब की कथित बिक्री को लेकर नाराजगी जताई। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि शराब की आसानी से उपलब्धता का सबसे ज्यादा असर युवा वर्ग पर पड़ रहा है।
लोगों के मुताबिक नशे की बढ़ती प्रवृत्ति के कारण कई परिवारों में विवाद, आर्थिक परेशानी और सामाजिक तनाव की स्थिति बन रही है। महिलाओं और बच्चों पर भी इसके प्रतिकूल असर की बात प्रदर्शनकारियों ने कही है। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि गांवों में शराब की कथित आपूर्ति और बिक्री पर प्रभावी रोक नहीं लग पा रही है। उनका कहना है कि बंडा शराबकांड के बाद ग्रामीण क्षेत्र के लोगों में भी डर और चिंता का माहौल है। ज्ञापन के माध्यम से ग्रामीणों ने मांग की है कि गांवों में बिक रही कथित अवैध शराब पर तत्काल रोक लगाई जाए। साथ ही शराब से संबंधित शिकायतों पर पुलिस और प्रशासन द्वारा तुरंत कार्रवाई की जाए, ताकि किसी बड़ी घटना को होने से पहले रोका जा सके।
प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन को चेतावनी भी दी है। उनका कहना है कि यदि समय रहते गांवों में शराब की बिक्री और आपूर्ति पर अंकुश नहीं लगाया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। ग्रामीणों ने धरना-प्रदर्शन, शराब दुकानों के घेराव और चक्काजाम जैसे कदम उठाने की चेतावनी दी है। हालांकि, इन आरोपों और मांगों पर प्रशासन की ओर से की जाने वाली कार्रवाई आगे महत्वपूर्ण होगी। प्रशासन की ओर से तहसीलदार और थाना प्रभारी ने प्रदर्शनकारियों का ज्ञापन लिया। वहीं बकस्वाहा क्षेत्र में शराब से जुड़ी शिकायतों और कथित अवैध बिक्री को लेकर पुलिस की कार्रवाई पर भी लोगों की नजर है।
बंडा शराबकांड के बाद शराब की बिक्री और निगरानी को लेकर प्रशासन पहले ही सवालों के घेरे में है। ऐसे में बकस्वाहा में महिलाओं का सड़क पर उतरना स्थानीय स्तर पर बढ़ती चिंता को दर्शाता है। अब ग्रामीणों की मांग पर प्रशासन क्या कदम उठाता है, यह देखने वाली बात होगी। फिलहाल प्रदर्शनकारियों ने साफ कर दिया है कि कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन का दायरा बढ़ाया जाएगा।