शादी का कार्ड खोलते ही हैक हुआ मोबाइल, समय पर थाने पहुंचा तो बची रकम
साइबर ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। शादी का डिजिटल निमंत्रण समझकर मोबाइल पर आई एक APK फाइल खोलना एक ग्रामीण को भारी पड़ गया। फाइल ओपन होते ही मोबाइल में संदिग्ध गतिविधियां शुरू हो गईं। मोबाइल हैक होने की आशंका से घबराया ग्रामीण बिना समय गंवाए थाने पहुंचा। थाना प्रभारी की सूझबूझ और तत्काल कार्रवाई से संभावित आर्थिक नुकसान टल गया। मामला एमपी के शहडोल के बुढार थाना क्षेत्र के खमरौध गांव निवासी सुनील कुमार पाठक से जुड़ा है। सुनील के मोबाइल पर शादी के आमंत्रण के नाम से एक APK फाइल भेजी गई थी। इसे उन्होंने शादी का डिजिटल कार्ड समझकर खोल दिया। फाइल ओपन करते ही मोबाइल में कुछ संदिग्ध गतिविधियां नजर आने लगीं। इसके बाद सुनील को मोबाइल और बैंकिंग जानकारी के साथ छेड़छाड़ की आशंका हुई।
सुनील ने घबराने के बजाय तुरंत बुढार थाने पहुंचकर थाना प्रभारी संजय जायसवाल को पूरी घटना बताई। मामले की गंभीरता को समझते हुए टीआई ने तत्काल सुरक्षा के उपाय शुरू करवाए। पुलिस ने सबसे पहले मोबाइल से सिम कार्ड निकलवाकर उसे थाने में मौजूद एक पुलिसकर्मी के मोबाइल में लगवाया। इसके बाद बैंक खाते से संबंधित जरूरी सुरक्षा कदम उठाए गए। समय रहते उठाए गए इन कदमों की वजह से साइबर ठग कथित तौर पर ग्रामीण के बैंक खाते तक पहुंच बनाकर रकम निकालने में सफल नहीं हो सके। साइबर अपराधों में अनजान APK फाइल या संदिग्ध लिंक खोलना जोखिम भरा हो सकता है। कुछ मामलों में ऐसी फाइलों के जरिए मोबाइल की संवेदनशील जानकारी तक पहुंच बनाने की कोशिश की जाती है।
थाना प्रभारी संजय जायसवाल ने लोगों से अपील की है कि मोबाइल पर आने वाली अनजान APK फाइल, लिंक या संदिग्ध दस्तावेज को बिना जांचे-परखे ओपन न करें। खासतौर पर शादी के कार्ड, बिजली बिल, बैंक अपडेट, KYC, सरकारी दस्तावेज या अन्य जरूरी कागजात के नाम पर आने वाली फाइलों से सावधान रहें। किसी संदिग्ध गतिविधि की आशंका होने पर तुरंत बैंक और पुलिस से संपर्क करें। एक छोटी सी लापरवाही मोबाइल और बैंक खाते पर भारी पड़ सकती है। लेकिन इस मामले में ग्रामीण की सतर्कता और पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने संभावित साइबर ठगी को समय रहते रोक दिया। ऐसे में अनजान फाइल और लिंक से दूरी रखना ही सबसे बड़ी सावधानी है।