Sagar- सुनार नदी के बीच विराजे अद्भुत गणेश जी, चारों दिशाओं में दर्शन, नगर के राजा की आरती में उमड़ रहे श्रद्धालु
हर साल सागर जिले के रहली क्षेत्र में एक सुखद और अद्भुत नज़ारा दिखाई देता है। पहले बात नगर की जीवनदायिनी माने जाने वाली सुनार नदी की धार के बीच नाव पर बिराजे गणपति बाप्पा की। जितनी ये प्रतिमा अपनी आप में अनूठी है उतना ही दिलचस्प यहां का नज़ारा होता है। यहां की एक ख़ास बात और भी है की गणेश जी एक नहीं बल्कि चारों दिशाओं में घूमकर भक्तों को दर्शन देते हैं। सैंकड़ों की संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन करने पहुंचते हैं। हर दिन सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं। इसके अलावा सभी घाटों पर एक साथ आरती भी की जाती है जिससे यहां का मंज़र देखने लायक होता है। गणपति जी के साथ सुनार मैया की आरती भी की जाती है।
वहीं अब बात रहली में ही बिराजे नगर के राजा के नाम से मशहूर गणपति बाप्पा की, जिनके दर्शनों को पूरा नगर उमड़ रहा है। प्रमुख चांदपुर तिराहे पर जय भारत गणेश मंडल द्वारा स्थापित रहली के राजा की प्रतिमा भक्तों की आस्था का केंद्र बनी हुई है। हर दिन शाम को होने वाली भव्य आरती में रहली नगर समेत आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन और पुण्य लाभ लेने पहुंच रहे हैं। यहां लगातार 26 सालों से भी ज्यादा समय से गणपति जी की विशाल और मनमोहक प्रतिमा स्थापित की जा रही है। एकादशी पर विशेष महाआरती होती है। वहीं द्वादशी पर भगवान श्री गणेश को 56 भोग अर्पित करने की परंपरा निभाई जाती है।
रहली में अटल पुल के नजदीक सुनार नदी की धार में नाव पर बिराजे गणपति बाप्पा सभी के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। हर दिन शाम के समय पहले रामलीला का आयोजन होता है। इसके बाद गणेश जी के साथ नगर की जीवन रेखा सुनार नदी की आरती भी की जाती है। बताया गया की आयोजक समिति द्वारा सुनार नदी में पीपा की नाव बनाकर गणपति जी की प्रतिमा स्थापित की जाती है। जिसकी सबसे ख़ास बात ये है की गणपति जी द्वारा चारों ओर घूमते हुए हर दिशा में भक्तों को दर्शन करने मिलते हैं। दस दिनों के इस पूरे उत्सव में हर दिन सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। वहीं सभी घाटों पर भक्तों द्वारा एक साथ आरती की जाती है। हर रोज यहां पहुंचने वाले भक्त धर्म लाभ ले रहे हैं।