सांकेतिक चिता के बीच जल उठी वास्तविक चिता, प्रशासनिक बेरुखी की बलि चढ़ी वृद्ध महिला,आंदोलन जारी !
पहले लोगों के गांव डूब रहे थे, घर डूब रहे थे, लेकिन अब उनकी ज़िंदगियां भी डूबने लगी हैं। अपने हक़ के लिए लोग चिता आंदोलन कर रहे हैं पानी के लंबे समय से प्रदर्शन किया जा रहा है। इसी बीच दुखद खबर ये आई की वास्तव में एक महिला की चिता जलानी पड़ी। मृतिका पूरी तरह बेघर होने के डर से तनाव में थी। ये दर्दनाक खबर हीरों की नगरी पन्ना जिले से सामने आई है।
दरअसल केन-बेतवा लिंक और मझगाय बांध परियोजना के डूब क्षेत्र को लेकर चिता आंदोलन किया जा रहा है। जहां बनहरीकला टपरिया निवासी 78 साल की रमिया बाई आदिवासी की जान चली गई। आंदोलनकारी अमित भटनागर का आरोप है कि चार महीने पहले बिना पूरा मुआवजा दिए घर तोड़े जाने के सदमे और लगातार बढ़ते पानी से बेघर होने के डर से रमिया बाई मानसिक तनाव में थीं। उनका खाना-पीना तक छूट गया था। उन्होंने जारी वीडियो का हवाला देते हुए इसे प्रशासनिक दमन और पुनर्वास प्रक्रियाओं में भ्रष्टाचार का नतीजा बताया। प्रभावितों का कहना है कि ₹12.50 लाख का पुनर्वास पैकेज और मकान-जमीन का लंबित भुगतान न मिलने के कारण कई जिंदगी संकट में है। अमित भटनागर ने मामले की निष्पक्ष जांच और मूलभूत सुविधाएं बहाल करने की मांग की है। वही बेघर हुए आदिवासी और किसान लगातार पांचवे दिन भी उफनती लहरों के बीच लकड़ी के ढाँचों यानि (चिताओं) पर लेटकर न्याय दो या मार दो के नारों के साथ जल-सत्याग्रह कर रहे हैं।
हालांकि अजयगढ़ एसडीएम आलोक मार्को ने इन आरोपों को सिरे से नकारा। उन्होंने कहा की महिला की जान पेट दर्द के कारण गयी है। प्रशासन के मुताबिक मृतिका को अधिग्रहित भूमि के लिए ₹28.70 लाख, मकान के लिए ₹15.23 लाख और पुनर्वास राशि के रूप में ₹5 लाख का पूरा भुगतान पहले ही किया जा चुका है।---