रिश्वतखोरी मामले में अदालत का बड़ा फैसला, महिला अधिकारी को तीन साल की सजा, 10 हजार जुर्माना !
रिश्वतखोरी के मामले में अदालत का एक बड़ा फैसला सामने आया है। जहां करीब छह साल पुराने मामले में महिला अधिकारी को तीन साल की कारावास और दस हजार रूपये के अर्थदंड से दंडित किया गया है। मामला छतरपुर जिले का है बताया गया की भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त पुलिस ने मामला दर्ज किया था। इस मामले में विशेष न्यायालय ने जनपद पंचायत छतरपुर की तत्कालीन ब्लॉक समन्वयक नीलम तिवारी को दोषी करार दिया है। शौचालय निर्माण की राशि हितग्राहियों के खातों में पहुंचाने के एवज में रिश्वत मांगने से ये पूरा मामला जुड़ा है।
जानकारी के मुताबिक फरियादी जितेंद्र सिंह ने सागर लोकायुक्त पुलिस से शिकायत की थी। जिसके हिसाब से जनपद पंचायत छतरपुर में ब्लॉक समन्वयक के पद पर पदस्थ नीलम तिवारी ने हितग्राहियों के खातों में शौचालय निर्माण की राशि डलवाने के एवज में 6 हजार 500 रुपये की रिश्वत मांगी थी। जिसमें एक हजार रूपये पहले लिए जा चुके थे। बाकि साढ़े पांच हजार रूपये बाद में लिए जाने थे। शिकायत पर लोकायुक्त ने सत्यापन कराया वहीं ट्रैप की योजना बनाई थी।
टीम ने 18 फरवरी 2020 में जाल बिछाया। जैसे ही नीलम तिवारी ने फरियादी से रकम ली वैसे ही टीम ने उन्हें रंगे हाथों पकड़ लिया। जिसमें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया गया था। मामला न्यायालय पहुंचा। जिसकी सुनवाई विशेष न्यायालय, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, छतरपुर में हुई। छह साल के बाद नीलम तिवारी को दोषी करार देते हुए तीन साल की सजा सुनाई गई। साथ ही दस हजार रूपये अर्थदंड भी लगाया गया।