हाथियों के डर के प्रभावित 1717 परिवारों के लिए पक्के मकान का प्रस्ताव, PM आवास योजना से जोड़ने की तैयारी
जंगल से निकलकर आबादी वाले इलाकों में पहुंच रहे जंगली हाथियों की आवाजाही ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। हाथियों के कारण कच्चे मकानों को होने वाले नुकसान और परिवारों की आवासीय सुरक्षा को देखते हुए वन विभाग ने अब एक बड़ी पहल शुरू की है। एमपी के शहडोल के उत्तर वन मंडल की DFO तरुणा वर्मा ने कलेक्टर को पत्र भेजकर हाथी प्रभावित परिवारों को पक्के मकान उपलब्ध कराने का प्रस्ताव रखा है। वन विभाग के सर्वे में हाथी प्रभावित इलाकों में कुल 1717 कच्चे मकान चिन्हित किए गए हैं। इनमें अमझोर में 102, शहडोल में 84, रामगढ़ और सतसरी में 56-56, झिरिया में 53, चंदेल में 44, बकड़ाडोल में 42, टेका में 38, बाटो में 37 और लखरी में 28 कच्चे मकान शामिल हैं। इसके अलावा दूसरे प्रभावित गांवों के मकान भी सर्वे में दर्ज किए गए हैं।
दरअसल, जंगल से लगे गांवों में हाथियों की लगातार आवाजाही के दौरान कई बार कच्चे मकानों को नुकसान पहुंचने की स्थिति बनती है। ऐसे में वन विभाग का उद्देश्य प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत के साथ ही लंबे समय के लिए सुरक्षित आवास उपलब्ध कराना है। इसी के तहत 1717 चिन्हित परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना से जोड़कर पक्के मकान दिलाने का प्रस्ताव रखा गया है। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो नियमानुसार आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इससे हाथियों की आवाजाही वाले क्षेत्रों में ग्रामीण परिवारों की आवासीय सुरक्षा बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
वहीं, शहडोल के अलावा उमरिया, रीवा और सीधी के आबादी वाले इलाकों में भी जंगली हाथियों की आवाजाही दर्ज की गई है। ब्यौहारी क्षेत्र में हाथियों के दल की मौजूदगी के बाद वन विभाग ने ग्रामीणों को सतर्क किया है। वन अमला हाथियों की लोकेशन पर नजर रख रहा है और लोगों से हाथियों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने की अपील की जा रही है। अब सभी की नजर वन विभाग के इस प्रस्ताव पर है। मंजूरी मिलने के बाद 1717 प्रभावित परिवारों के लिए सुरक्षित और पक्के आशियाने की दिशा में कदम आगे बढ़ सकता है।