चिताओं पर लेटकर आंदोलन और विस्थापन का दर्द, कमिश्नर के बयान ने घावों पर छिड़का नमक ! | SAGAR TV NEWS
लोग पहले से ही विस्थापन का दर्द झेल रहे हैं। अपनी जमीनें बचाने सांकेतिक चिताओं पर लेटकर आंदोलन कर रहे हैं। अपनी अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं। उस पर से सागर कमिश्नर द्वारा दिये गए बयान ने जख्मों पर मरहम नहीं बल्कि नमक छिड़कने का काम किया। जिससे आंदोलन और तेज हो गया है। इसी बीच मशाल जुलूस निकाला गया। तस्वीरें कहीं और नहीं बल्कि पन्ना जिले की हैं। जहां चिता आंदोलन सातवे दिन भीषण जनाक्रोश में बदल गया। बता दें की केन-बेतवा लिंक परियोजना, मझगाँव बाँध और ललितपुर-सिंगरौली रेल मार्ग से बेदखल हो रहे ग्रामीणों द्वारा आंदोलन किया जा रहा है डूब क्षेत्र में आ चुके विस्थापित जब बिना मुआवजा, पारदर्शी पुनर्वास और सामाजिक आंकलन के अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे थे।
तब पन्ना दौरे पर आए सागर संभाग के कमिश्नर दिलीप कुमार के एक कथित विवादित बयान ने जलते घावों पर नमक छिड़क दिया। कमिश्नर ने आंदोलनकारियों के अस्तित्व को ही नकारते हुए उन्हें गैर-विस्थापित करार दे दिया। जिसके बाद प्रभावितों की भीड़ 500 से बढ़कर अचानक 1300 के पार पहुंच गई।
किसान नेता अमित भटनागर के मुताबिक जब खुद प्रशासनिक टीम ने मौके पर 150 से ज्यादा प्रभावितों के नाम दर्ज किए हैं। तो इतने बड़े अधिकारी का यह बयान संवेदनहीनता और छुपाव की पराकाष्ठा है। ग्रामीणों के घरों में पानी भर रहा है लेकिन मुख्यमंत्री द्वारा घोषित 12.50 लाख रुपये की अतिरिक्त सहायता 2 महीने बाद भी नदारद है कई परिवारों को 8 साल पुराना 5 लाख का मुआवजा तक नहीं मिला।
अधिकार मांगने पर बिजली-पानी काटकर लोकतांत्रिक आवाज को दबाने की कोशिशों के बीच अब विस्थापितों ने रात में भी अनवरत आंदोलन जारी रखते हुए मशाल जुलूस निकाल दिया है। जब तक हर प्रभावित परिवार को पारदर्शी सर्वे, पूर्ण मुआवजा और सम्मानजनक पुनर्वास नहीं मिल जाता, तब तक यह लड़ाई थमने वाली नहीं है।