Sagar-थकान से धड़कन तक: थायरॉइड के लक्षणों पर IMA सागर का जागरूकता अभियान
थकान से धड़कन तक: थायरॉइड के लक्षणों पर IMA सागर का जागरूकता अभियान देवरी के बरकोटी में स्वास्थ्य शिविर आयोजित, डॉक्टरों ने हाइपो और हाइपरथायरॉइडिज्म के लक्षण बताए; TSH जांच से समय पर पहचान पर दिया जोर
सागर। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) सागर के तत्वावधान में आयुष्मान आरोग्य मंदिर, बरकोटी, देवरी में थायरॉइड जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में विशेषज्ञों ने थायरॉइड से जुड़ी समस्याओं, उनके लक्षणों और समय पर जांच के महत्व को लेकर ग्रामीणों को जानकारी दी।
कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को यह समझाना था कि शरीर में थायरॉइड हार्मोन का असंतुलन कई तरह के लक्षण पैदा कर सकता है और कई बार शुरुआती लक्षण सामान्य थकान, तनाव या उम्र बढ़ने से जुड़ी समस्याओं के रूप में नजरअंदाज कर दिए जाते हैं।
थायरॉइड हार्मोन शरीर के लिए क्यों जरूरी?
IMA सागर अध्यक्ष डॉ. तल्हा साद ने बताया कि थायरॉइड हार्मोन शरीर की कई महत्वपूर्ण रासायनिक और मेटाबॉलिक प्रक्रियाओं को नियंत्रित करने में भूमिका निभाते हैं। भोजन से ऊर्जा प्राप्त करने से लेकर शरीर के विभिन्न कार्यों के सामान्य संचालन तक इन हार्मोनों का महत्वपूर्ण योगदान होता है।
उन्होंने बताया कि थायरॉइड से संबंधित कई मामलों में लक्षण हल्के हो सकते हैं, जिसके कारण व्यक्ति समय पर चिकित्सकीय सलाह नहीं ले पाता। ऐसे में लक्षणों को लंबे समय तक नजरअंदाज करने के बजाय जरूरत के अनुसार चिकित्सकीय जांच कराना महत्वपूर्ण है।
महिलाओं में अधिक देखी जाती है थायरॉइड की समस्या
डॉ. तल्हा साद ने बताया कि महिलाओं में पुरुषों की तुलना में थायरॉइड संबंधी विकारों की संभावना अधिक होती है। उन्होंने महिलाओं को थायरॉइड से जुड़े लक्षणों के प्रति विशेष रूप से जागरूक रहने और आवश्यकता पड़ने पर चिकित्सकीय परामर्श लेने की सलाह दी।
हाइपोथायरॉइडिज्म में दिख सकते हैं ये लक्षण
शिविर में बताया गया कि जब थायरॉइड ग्रंथि कम सक्रिय होती है, तो इसे हाइपोथायरॉइडिज्म कहा जाता है। इसमें व्यक्ति को कई तरह की परेशानियां हो सकती हैं, जिनमें—
लगातार थकान महसूस होना वजन बढ़ना ठंड अधिक लगना त्वचा का शुष्क होना बालों का झड़ना उदासी या अवसाद जैसे लक्षण मासिक धर्म में अनियमितता
शामिल हो सकते हैं।
हाइपरथायरॉइडिज्म में बढ़ सकती है धड़कन
वहीं, थायरॉइड ग्रंथि के अधिक सक्रिय होने की स्थिति को हाइपरथायरॉइडिज्म कहा जाता है। इसमें तेज हृदय गति, भूख बढ़ने के बावजूद वजन कम होना, बेचैनी या चिंता, नींद में परेशानी और गर्मी के प्रति अधिक संवेदनशीलता जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
डॉक्टरों ने स्पष्ट किया कि इन लक्षणों के कई अन्य कारण भी हो सकते हैं। इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर थायरॉइड की बीमारी का निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए।
TSH जांच से हो सकती है शुरुआती पहचान
शिविर में बताया गया कि थायरॉइड की स्थिति की जांच के लिए TSH जैसे रक्त परीक्षण महत्वपूर्ण हैं। समय पर जांच और चिकित्सकीय परामर्श से थायरॉइड संबंधी समस्या की पहचान की जा सकती है और डॉक्टर की सलाह के अनुसार उपचार एवं निगरानी की जा सकती है।
कार्यक्रम में BMO डॉ. पूजा परमार, डॉ. रेशमी सेडान, नर्सिंग स्टाफ, आशा कार्यकर्ता, पिरामल स्वास्थ्य से आयुषी शुक्ला सहित बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक मौजूद रहे। स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम में लोगों ने सहभागिता कर थायरॉइड से जुड़े सवालों की जानकारी ली।