Sagar - श्मशान घाट नहीं, दलदल से होकर पहुंचते ग्रामीण... बारिश में खुले आसमान के नीचे अंतिम संस्कार
सागर जिले की मालथौन तहसील के नौनियाँ गांव से सामने आई तस्वीरें व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाली हैं। गांव में श्मशान घाट की सुविधा नहीं होने के कारण ग्रामीणों को बारिश के बीच खुले आसमान के नीचे अंतिम संस्कार करने को मजबूर होना पड़ा। जिस जगह पर किसी इंसान को अंतिम विदाई सम्मान के साथ मिलनी चाहिए, वहां ग्रामीणों को मौसम और बदहाल रास्ते से जूझते हुए अंतिम संस्कार करना पड़ा।
शनिवार को गांव के 75 वर्षीय धनपत आदिवासी का निधन हो गया। परिजन और ग्रामीण जब उन्हें अंतिम संस्कार के लिए लेकर निकले तो श्मशान तक पहुंचने वाला रास्ता भी किसी चुनौती से कम नहीं था। बारिश के बाद रास्ता पूरी तरह दलदल में तब्दील हो गया था। ग्रामीण घुटनों तक मिट्टी में धंसते हुए शव को लेकर आगे बढ़े। हर कदम पर पैर फिसलने और कीचड़ में धंसने का खतरा बना रहा।
किसी तरह ग्रामीण अंतिम संस्कार की जगह तक पहुंचे, लेकिन वहां भी उनकी मुश्किलें खत्म नहीं हुईं। श्मशान घाट न होने के कारण घास के मैदान जैसी खुली जगह पर अंतिम संस्कार की तैयारी करनी पड़ी। आसमान में बादल छाए थे और बारिश भी हो रही थी। इसी बारिश के बीच ग्रामीणों ने धनपत आदिवासी को अंतिम विदाई दी।
यह दृश्य सिर्फ एक परिवार के दुख की कहानी नहीं, बल्कि गांव में बुनियादी सुविधाओं की कमी की तस्वीर भी है। जिंदगी भर गांव में रहने वाले एक बुजुर्ग को अंतिम सफर में भी ऐसी परिस्थितियों से गुजरना पड़ा, जहां न पक्का रास्ता था और न अंतिम संस्कार के लिए व्यवस्थित जगह।