Sagar - दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष से मिले गोपाल भार्गव, राजनीतिक सरगर्मी बढ़ी
मध्यप्रदेश की राजनीति में इन दिनों भोपाल से लेकर दिल्ली तक सांगठनिक और राजनीतिक समीकरणों को साधने की हलचल तेज हो गई है। हाल ही में मुख्यमंत्री, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष और सरकार के कई प्रमुख नेताओं के दिल्ली दौरों के बाद, अब प्रदेश के सबसे सीनियर विधायक पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव ने दिल्ली में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन से मुलाकात की है।
भार्गव ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा है इस मुलाकात के दौरान मध्यप्रदेश और राष्ट्रीय संगठन से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। हालांकि अन्य नेताओं ने दिल्ली दौरों को औपचारिक भेंट ही बताया है, लेकिन मध्यप्रदेश में मोहन सरकार के तीन साल पूरे होने में सिर्फ 3 माह ही बचे हैं, सत्ता संगठन में विस्तार की अटकलों के बीच मुलाकात से राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है।
भाजपा का पारंपरिक और मजबूत किला माने जाने वाले बुंदेलखंड अंचल में राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर अंदरूनी चर्चाएं गरमाई हैं। राजनीतिक ढांचे में यह पहला मौका है जब इतने वर्तमान महत्वपूर्ण अंचल से केवल 1 कैबिनेट मंत्री और 4 राज्यमंत्री ही शामिल हैं। इसकी तुलना में पूर्ववर्ती शिवराज सरकार के दौरान अकेले सागर जिले से ही 3 कैबिनेट मंत्री हुआ करते थे, जबकि पूरे बुंदेलखंड अंचल से 5 कैबिनेट मंत्रियों के साथ राज्यमंत्री भी सरकार में जिम्मेदारी संभाल रहे थे। ऐसे में अंचल के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच क्षेत्रीय संतुलन तथा शक्ति संतुलन को लेकर नए समीकरण बनने लगे हैं।
आगामी नगरीय निकाय चुनाव 2027 में अब एक साल से भी कम समय बचा है, जिसके ठीक बाद 2028 का विधानसभा चुनाव होना है। बुंदेलखंड में भाजपा अपने इस मजबूत किले को हर हाल में अक्षुण्ण रखना चाहती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शीर्ष नेतृत्व के साथ हुई इस उच्चस्तरीय चर्चा का मुख्य उद्देश्य अंचल में कार्यकर्ताओं के तालमेल, सांगठनिक कसावट और बुंदेलखंड के राजनीतिक प्रभाव को बनाए रखना है। वरिष्ठ नेताओं की केंद्रीय नेतृत्व से सीधी बातचीत को आने वाले समय में प्रदेश के साथ ही बुंदेलखंड के सियासी समीकरणों को नया आकार देने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
मोहन सरकार में मंत्रीमंडल विस्तार की चर्चा इतनी आम है कि हर माह कोई न कोई तारीख बताई जाती है। यह बात अलग है कि अब तक विस्तार नहीं हुआ लेकिन मुख्यमंत्री से लेकर प्रदेशाध्यक्ष तक ने इससे इनकार नहीं किया। विस्तार के संकेत जरूर दिए। सरकार में जाने की चाबी भाजपा के शीर्ष नेतृत्व यानी दिल्ली पर ही निर्भर है। ऐसे में सागर सहित बुंदेलखंड के कई विधायक जो मंत्रिमंडल में जगह बनाना चाहते हैं वे भी लगातार दिल्ली कूच कर रहे हैं। यह बात अलग है कि कुछ गोपनीय मिल रहे हैं तो कुछ खुलकर ।