MP में 2055 तक पानी की चिंता खत्म करने का दावा, ₹458 करोड़ के चंबल वाटर प्रोजेक्ट का निरीक्षण
एमपी के मुरैना और ग्वालियर के लोगों के लिए पेयजल से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने रविवार को मुरैना में चल रहे चंबल वाटर प्रोजेक्ट के निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि परियोजना के जरिए मुरैना और ग्वालियर के हर नल तक चंबल का पानी पहुंचाने का लक्ष्य है, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके। करीब 458 करोड़ 68 लाख रुपये की लागत से तैयार हो रही इस परियोजना को दोनों शहरों की आगामी वर्षों की पेयजल जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित किया जा रहा है। परियोजना का उद्देश्य स्वच्छ और मानकों के अनुरूप पेयजल उपलब्ध कराना है।
सिंधिया ने मुरैना जिले के कोतवाल डैम और नूराबाद से ग्वालियर के बीच चल रहे निर्माण कार्यों का जायजा लिया। इस दौरान जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट और विभागीय अधिकारी भी मौजूद रहे। परियोजना के तहत चंबल नदी से 90 एमएलडी, कोतवाल बांध से 60 एमएलडी और रमौआ बांध से 45 एमएलडी पानी लेने की योजना बताई गई है। यानी कुल करीब 200 एमएलडी पानी पाइपलाइन के जरिए मुरैना और ग्वालियर तक पहुंचाने का लक्ष्य है।
इसके लिए लगभग 11 हजार 500 डायमीटर की पाइपलाइन बिछाई जानी है। पाइपलाइन के रास्ते में आने वाली क्वारी, आसन और सांक नदियों पर पुल निर्माण भी प्रस्तावित है। निरीक्षण के दौरान सिंधिया ने कहा कि परियोजना केवल वर्तमान आबादी की जरूरत पूरी करने के लिए नहीं, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों को ध्यान में रखकर बनाई जा रही है। उन्होंने कांग्रेस के पिछले शासनकाल पर टिप्पणी करते हुए कहा कि उस समय 2055 तक की पेयजल जरूरत को लेकर इस तरह की योजना पर काम नहीं हुआ।
इसी दौरान सिंधिया ने आगरा-ग्वालियर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि करीब 5,200 करोड़ रुपये की लागत से 88 किलोमीटर लंबा छह लेन हाईवे प्रस्तावित है। वहीं कार्यक्रम में कुछ स्थानीय भाजपा पदाधिकारियों की गैरमौजूदगी को लेकर संगठन के भीतर मतभेद की चर्चाएं भी सुनाई दीं। हालांकि गैरमौजूदगी की वजह को लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।