प्रशासन का चला बुलडोजर, मुआवजे को लेकर भड़के किसान; विधायक ने कलेक्टर से की चर्चा
एमपी के सीधी जिले के ललितपुर–सिंगरौली रेल परियोजना के लिए सीधी में प्रशासन की कार्रवाई के दौरान उस वक्त विवाद की स्थिति बन गई, जब परियोजना की जद में आए मकानों को हटाने के लिए प्रशासन की टीम बुलडोजर लेकर गांव पहुंची। कार्रवाई शुरू होते ही प्रभावित किसान और ग्रामीण मौके पर जुट गए और मुआवजे से जुड़ी अपनी आपत्तियां अधिकारियों के सामने रखीं। मामला बहरी तहसील के चंदवाही गांव का है। यहां ललितपुर–सिंगरौली रेल परियोजना के लिए भूमि और मकानों का अधिग्रहण किया गया है। परियोजना की जद में आने वाले मकानों को हटाने की कार्रवाई शुरू हुई तो प्रभावित परिवारों ने विरोध जताया।
किसानों का आरोप है कि कई परिवारों को अब तक उनके मकानों का उचित मुआवजा नहीं मिला है। ग्रामीणों का कहना है कि मकानों का सही मूल्यांकन किए बिना ही उन्हें हटाने की कार्रवाई की जा रही है। किसानों की मांग है कि पहले नियमानुसार मुआवजा दिया जाए और इसके बाद ही मकानों को हटाया जाए। वहीं, ग्रामीणों ने मृतक खातेदारों के वारिसों को जारी किए गए नोटिस को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि पहले वारिसाना प्रक्रिया पूरी कर संबंधित वारिसों के नाम दर्ज किए जाएं और इसके बाद मुआवजा वितरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए।
विरोध की जानकारी मिलने पर सिहावल विधायक विश्वामित्र पाठक भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने प्रभावित ग्रामीणों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं। किसानों ने विधायक को मुआवजा, मकानों के मूल्यांकन और नोटिस से जुड़ी अपनी शिकायतें बताईं। इसके बाद विधायक ने मौके से ही जिला कलेक्टर से फोन पर चर्चा की और प्रभावित किसानों की मांगों से अवगत कराया। विधायक ने मकानों का उचित मूल्यांकन कराने और पात्र प्रभावित परिवारों को नियमानुसार मुआवजा दिलाने की मांग रखी।
हालांकि, प्रशासन का कहना है कि परियोजना से प्रभावित पात्र हितग्राहियों को मुआवजे का भुगतान किया जा चुका है, जबकि जिन मामलों में प्रक्रिया लंबित है, उनका नियमानुसार परीक्षण किया जा रहा है। अब कार्रवाई के बाद किसानों के दावों, मकानों के मूल्यांकन और लंबित मुआवजा प्रकरणों पर प्रशासन की अगली कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।