अतिक्रमण हटाते हुए तोड़ दिए तीन मकान, तीन लोगों ने पीया जह रीला पदार्थ, बोले अब कहां जाएंगे !
अतिक्रमण कार्यवाई के दौरान ऐसा बवाल हुआ की हंगामा खड़ा हो गया। तीन मकान तोड़े जाने से नाराज़ तीन लोगों ने जहरीला पदार्थ पी लिया। जिन्हे अस्पताल भेजा गया था। लोगों का आरोप था की मकान टूटने से वह बेघर हो जाएंगे। जैसे-तैसे करके उन्होंने घर बनवाये थे। मामला धार जिले के धामनोद थाना क्षेत्र का है जहां बेगंदा गांव में पट्टे की जमीन पर अतिक्रमण हटाने की कार्यवाई पर विवाद हुआ। आरोप है की नर्मदा परिक्रमा आश्रम के पास बने 3 मकानों को प्रशासन ने जेसीबी से तोड़ दिया। प्रभावित परिवारों ने संबंधित जमीन के भूमिस्वामी अधिकार पत्र/पट्टे होने का दावा किया।
मकान तोड़े जाने से परिवार के दो सदस्यों गोपाल और रेखा बाई ने जहरीला पदार्थ पी लिया। जिन्हे धामनोद अस्पताल ले जाया गया था। जिन्हे कुछ समय बाद रैफर किया गया था। वहीं एक अन्य ने भी ऐसा ही किया। उसके परिवार का सरपंच से भी विवाद हुआ। जिस पर पुलिस ने मामला दर्ज किया।
बताया गया की धरमपुरी तहसीलदार ने बीते 16 सितंबर को पुलिस बल उपलब्ध कराने पत्र जारी किया था। 20 सितंबर की शाम संबंधित परिवारों को नोटिस दिए गए। वहीं इसके बाद अगले दिन राजस्व और पुलिस अमले की मौजूदगी में ग्राम पंचायत ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की।
परिवार का आरोप था की उन्हें कार्रवाई से एक दिन पहले ही नोटिस दिया गया। बारिश के बीच बिना वैकल्पिक व्यवस्था के मकान तोड़ दिए गए। परिवार का कहना था की पंचायत की ओर से करीब चार साल पहले पट्टे जारी किए गए थे। दस्तावेजों में उमेश और विष्णु के लिए 60-60 वर्ग मीटर और कैलाश के भूखंड के अधिकार पत्र का उल्लेख होने की बात कही गई। मकान तोड़े जाने से नाराज़ परिवार के दो सदस्यों ने घातक कदम उठाया। वहीं प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्होंने कर्ज लेकर ईंट और चद्दर से मकान बनाए थे। अब उनके पास रहने की जगह नहीं बची। इसके अलावा देर रात एक और व्यक्ति द्वारा जहरीला पदार्थ पीने की बात सामने आई थी। सरपंच और पीड़ित परिवार के बीच विवाद भी हुआ था। जिस पर पुलिस ने मामला जांच में लिया।
खैर इस बात की पुष्टि होना बाकी है की पट्टे वैध थे या नहीं, ये जांच का विषय है दस्तावेज जांचने पर ये साफ़ हो पायेगा।-