वन अधिकार और विस्थापन के मुद्दों पर ग्रामीणों का प्रदर्शन, 12 सूत्रीय मांगों को लेकर सौंपा ज्ञापन
वन भूमि, राजस्व भूमि, वन अधिकार, विस्थापन और आजीविका से जुड़े मुद्दों के निराकरण की मांग को लेकर एमपी के सागर संभाग के दमोह जिले के अलग-अलग गांवों से बड़ी संख्या में ग्रामीण कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचे। ग्रामीणों ने अपनी विभिन्न समस्याओं को लेकर ज्ञापन सौंपते हुए लंबित मामलों के जल्द निराकरण की मांग उठाई। मध्य प्रदेश एकता परिषद के बैनर तले ग्रामीणों ने जनजाति विभाग के संयोजक के नाम ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों का कहना है कि जिले में लंबे समय से वन अधिकार कानून से जुड़े कई दावे लंबित हैं। इन दावों के निराकरण के लिए सक्रिय अभियान चलाकर पात्र हितग्राहियों को उनका अधिकार दिलाने की मांग की गई है।
ग्रामीणों ने वन अधिकार कानून 2006 के तहत जारी किए गए वन अधिकार पत्रों में सामने आई कथित त्रुटियों को भी प्रमुख मुद्दा बनाया। उनका कहना है कि जिन हितग्राहियों को वन अधिकार पत्र जारी किए गए हैं, उनमें यदि किसी प्रकार की गलती है तो अभियान चलाकर तत्काल सुधार कराया जाना चाहिए। इसके साथ ही वन अधिकार पत्र धारक किसानों की भूमि को राजस्व भूमि में परिवर्तित करने की प्रक्रिया शुरू करने की मांग भी ज्ञापन में शामिल की गई है। ग्रामीणों ने वन भूमि से जुड़े मामलों, विस्थापन और आजीविका से संबंधित समस्याओं का भी समयबद्ध तरीके से निराकरण करने की मांग रखी।
बताया गया कि ग्रामीणों की ओर से करीब 12 सूत्रीय मांगों को लेकर प्रशासन के समक्ष अपनी बात रखी गई है। ग्रामीणों का कहना है कि इन समस्याओं का सीधा असर उनके रोजगार, खेती और जीवन-यापन पर पड़ रहा है, इसलिए प्रशासन को इन मामलों में गंभीरता से कार्रवाई करनी चाहिए। कलेक्ट्रेट परिसर में बड़ी संख्या में ग्रामीणों के पहुंचने से प्रशासन का ध्यान इन मुद्दों की ओर गया। ग्रामीणों ने ज्ञापन के माध्यम से अपनी मांगें प्रशासन तक पहुंचाईं और उनके निराकरण की उम्मीद जताई। अब देखना होगा कि ग्रामीणों द्वारा उठाए गए वन अधिकार, भूमि, विस्थापन और आजीविका से जुड़े इन मुद्दों पर प्रशासन की ओर से क्या कार्रवाई की जाती है।